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जलापूर्ति परियोजनाओं में देरी पर सख्ती, हर सप्ताह दो-दो जलार्पण कराने के निर्देश

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने मंडलवार समीक्षा में तय समयसीमा में योजनाएं पूरी करने को कहा; लापरवाही मिलने पर अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों पर कार्रवाई की चेतावनी
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Bureau News Desk
18 Aug 2026
10:37 AM
1 min read
जलापूर्ति परियोजनाओं में देरी पर सख्ती, हर सप्ताह दो-दो जलार्पण कराने के निर्देश
हाइलाइट्स
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने विभिन्न पेयजल योजनाओं की मंडलवार समीक्षा की।
अधिकारियों को सभी जलापूर्ति परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को हर सप्ताह दो-दो जलार्पण कराने को कहा गया।
योजनाओं में लापरवाही या अनावश्यक देरी मिलने पर अधिकारी और निर्माण फर्म के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल पहुंचाने के लिए चल रही विभिन्न जलापूर्ति परियोजनाओं की प्रगति को लेकर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने सोमवार को मंडलवार समीक्षा की। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेयजल योजनाओं में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में अधिकारियों को परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने, लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने और योजनाओं की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

समीक्षा बैठक के दौरान जलशक्ति मंत्री ने मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को प्रत्येक सप्ताह दो-दो जलार्पण कराने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य तैयार हो रही परियोजनाओं को जल्द पूरा कर उनके लाभ को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना बताया गया। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए और जरूरत के अनुसार मैनपावर बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि संसाधनों की कमी को परियोजनाओं में देरी का कारण न बनने दिया जाए। जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि काम निर्धारित मानकों और समयसीमा के अनुसार आगे बढ़े।

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बैठक में स्वतंत्रदेव सिंह ने अधिकारियों को योजनाओं में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और निर्माण फर्म के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की प्रगति में किसी तरह की अनावश्यक देरी होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। निर्माण एजेंसियों के स्तर पर लंबित कार्यों की निगरानी करने और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी गई है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसी योजना का काम केवल कागजी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी स्थिति का भी सत्यापन किया जाए।

जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों से नियमित रूप से क्षेत्रों में रात्रिप्रवास करने और मौके पर जाकर पेयजल योजनाओं का निरीक्षण करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल से जुड़ी समस्याओं को मौके पर पहुंचकर समझा जाए और उनके त्वरित समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस निर्देश के तहत अधिकारियों को योजनाओं की वास्तविक प्रगति, निर्माण की स्थिति और लोगों तक पहुंच रही पेयजल सुविधा का निरीक्षण करने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि केवल कार्यालय स्तर पर समीक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी योजनाओं की स्थिति की निगरानी आवश्यक है।

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मंत्री ने अधिकारियों से पिछले एक महीने में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने परियोजनावार स्थिति की समीक्षा करते हुए उन कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने को कहा जो लंबित हैं। अधिकारियों से योजनाओं की मौजूदा प्रगति, लंबित कार्य और उन्हें पूरा करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी ली गई। समीक्षा के दौरान काम में तेजी लाने और तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहा।

मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए अधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी के साथ-साथ जमीन पर उनकी प्रगति का सत्यापन भी करना होगा। पेयजल परियोजनाओं के लिए बनाई गई कार्ययोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने और निर्माण प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब को रोकने के निर्देश दिए गए। विभागीय अधिकारियों से कहा गया कि वे परियोजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से देखें और जहां आवश्यक हो, वहां प्रशासनिक या मानव संसाधन संबंधी जरूरतों को पूरा करें।

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समीक्षा बैठक में निर्माण एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि यदि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे परियोजनाओं की समयसीमा और काम की गुणवत्ता दोनों पर निगरानी बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों और एजेंसियों पर रहेगी। अधिकारियों से कहा गया कि वे परियोजनाओं में आ रही अड़चनों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर करें।

मंडलवार समीक्षा बैठक में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह, स्टेट कोऑर्डिनेटर डीके सिंह और मुख्य अभियंता ग्रामीण, उत्तर प्रदेश जल निगम एके सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों से सीधे संवाद के माध्यम से योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए।

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