>भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में 7 से 15 नवंबर तक विशेष उत्सव मनाएगी। यह वो गीत है जिसने आजादी की लड़ाई में करोड़ों भारतीयों के मन में ऊर्जा, साहस और राष्ट्रनिष्ठा का संचार किया। पहली बार 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी इस कृति को 1950 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रगीत का दर्जा दिया।
>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने पार्टी मुख्यालय में बताया कि यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की आत्मा है एक ऐसा मंत्र जिसने गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने में देश की शक्ति को जगाया। उन्होंने कहा “वंदे मातरम् नवभारत के संकल्प और राष्ट्रप्रेम की धड़कन है। यह हमें याद दिलाता है कि भारत केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि संस्कृति, भावनाओं और कर्तव्यबोध से निर्मित राष्ट्र है।”
>7 नवंबर को प्रदेश के 18 प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, मेरठ, गाजियाबाद और अलीगढ़ में 150 कार्यकर्ता एक साथ सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गायन और सभा करेंगे।
>8 से 15 नवंबर तक पूरे प्रदेश में जिला-स्तरीय कार्यक्रम होंगे, जिनमें सांसद, विधायक, कई सामाजिक संगठन और आम जनता शामिल होगी।
>प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह अभियान इतिहास के सम्मान के साथ भविष्य के निर्माण का संदेश भी देगा।
>वंदे मातरम् का ऐतिहासिक संदर्भ
>1875: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने गीत रचा
>1896: रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार सार्वजनिक वाचन किया
>स्वतंत्रता संग्राम के हर चरण में यह गीत प्रेरणा बना
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>आज भी राष्ट्रीय एकता और भावनात्मक बंधन का सबसे सशक्त प्रतीक
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