>राजधानी दिल्ली के करोल बाग स्थित विशाल मेगा मार्ट में 5 जुलाई को हुई भीषण आग की घटना ने न सिर्फ दो निर्दोष जिंदगियां निगल लीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही भी बेनकाब कर दी। अब इस दर्दनाक हादसे की न्यायिक जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
>एनजीओ 'कुटुंब' ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, और एमसीडी की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन संस्थाओं की लापरवाही और सुरक्षा मानकों को लागू न करने के कारण यह हादसा हुआ।
>आग में झुलसी उम्मीदें, मौत के मुंह में समाए लोग
>इस हादसे में 25 वर्षीय धीरेंद्र प्रताप की मौत हो गई, जो लिफ्ट में फंसा रह गया था। उसके द्वारा भाई को भेजे गए आखिरी मैसेज में वह मदद की गुहार लगाते हुए कहता है कि “मैं फंस गया हूं, सांस नहीं ले पा रहा।” अग्निशमन अभियान के दौरान एक और जली हुई लाश बरामद हुई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
>लाइसेंस व सुरक्षा मानकों पर सवाल
>एनजीओ ने कोर्ट से मांग की है कि वह यह जांच कराए कि विशाल मेगा मार्ट और उसके आसपास के व्यापारिक प्रतिष्ठानों के पास वैध एनओसी और लाइसेंस हैं या नहीं। साथ ही अवैध रूप से संचालित हो रहे मॉल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और अन्य संस्थानों को रिपोर्ट आने तक तत्काल बंद करने का आदेश भी मांगा गया है।
>पुराने हादसों से भी नहीं लिया सबक
>यह याचिका 27 जुलाई 2024 को पुराने राजेन्द्र नगर में एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में हुए जलभराव से तीन छात्रों की मौत के मामले से जुड़ी चल रही कार्यवाही के तहत दी गई है। कुटुंब संस्था का कहना है कि राजधानी में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं।
>सीसीटीवी फुटेज और एफआईआर स्टेटस की रिपोर्ट मांगी
>याचिका में कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि दिल्ली पुलिस को निर्देशित किया जाए कि वह 4 से 5 जुलाई तक की सीसीटीवी फुटेज जब्त करे और एफआईआर की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करे।
>अगली सुनवाई जल्द
>दिल्ली हाईकोर्ट इस याचिका पर जल्द ही सुनवाई करने वाली है, और उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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