करीब 20 हजार करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। मामला दो चीनी नागरिकों से जुड़ा है, जिन्हें निचली अदालत ने चीन जाने की अनुमति दी थी। लेकिन अब दिल्ली हाई कोर्ट ने उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले के पीछे अदालत की एक चिंता सबसे ज्यादा चर्चा में है। अगर दोनों आरोपी चीन चले गए तो क्या वे दोबारा भारत लौटेंगे? यही सवाल सुनवाई के दौरान प्रमुख रूप से उभरा।
न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए 17 जून 2026 के ट्रायल कोर्ट के आदेश के अमल पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपी चीन के नागरिक हैं और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोप हैं। अदालत ने यह भी माना कि भारत और चीन के बीच प्रत्यर्पण व्यवस्था नहीं होने के कारण उनके वापस न लौटने की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
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इस मामले में जिन दो आरोपियों का नाम सामने आया है उनमें गुआंगवेन कुआंग उर्फ एंड्रयू, वेइगांग वांग शामिल हैं। गुआंगवेन कुआंग को अक्टूबर 2023 में गिरफ्तार किया गया था। उसे नवंबर 2024 में जमानत मिली थी। ईडी दोनों के खिलाफ पीएमएलए के तहत आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
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सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एक और पहलू पर ध्यान दिया। रिकॉर्ड के अनुसार, आठ जून को ट्रायल कोर्ट ने गुआंगवेन कुआंग की विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन बाद में परिस्थितियों में किसी बड़े बदलाव के बिना उसे यात्रा की अनुमति दे दी गई। हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि ईडी की यह दलील विचारणीय है कि इस स्तर पर विदेश यात्रा की अनुमति जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक जांच के दौरान यह सामने आया कि Vivo Mobile India Private Limited और उससे जुड़ी कुछ राज्य स्तरीय डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों ने कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय प्राप्त की। एजेंसी का आरोप है कि गुआंगवेन कुआंग ने लाभकारी स्वामित्व को छिपाने, कंपनियों की स्थापना करने और कथित धन को इधर-उधर स्थानांतरित करने में भूमिका निभाई। ईडी ने छह दिसंबर 2023 को इस मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। इसके बाद 20 दिसंबर 2023 को ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए गुआंगवेन कुआंग को आरोपी के रूप में तलब किया था।
सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को ट्रायल कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को रद्द कर दिया था। इस आदेश को भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। हालांकि आरोपी पक्ष का कहना है कि बाद में दी गई चुनौती को यात्रा अनुमति रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल निचली अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विस्तृत सुनवाई के दौरान अदालत आगे क्या रुख अपनाती है।
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