पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज हुआ, जब शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में हजारों भाजपा समर्थकों की मौजूदगी के बीच उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। भाजपा की प्रचंड जीत के बाद आयोजित यह समारोह राज्य की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के सबसे बड़े घटनाक्रमों में से एक माना जा रहा है।
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं, पिछले 15 वर्षों से सत्ता में रही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। चुनाव परिणामों के बाद राज्य में पहली बार भाजपा सरकार के गठन ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड को शपथ ग्रहण समारोह के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और एनडीए गठबंधन के कई मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता और विभिन्न राज्यों से पहुंचे पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान मैदान में भाजपा समर्थकों का उत्साह और नारेबाजी देखने को मिली।
भाजपा नेताओं ने इस जीत को पश्चिम बंगाल में “नए राजनीतिक युग” की शुरुआत बताया। पार्टी का कहना है कि यह केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा में व्यापक बदलाव का संकेत है। भाजपा नेतृत्व ने इसे संगठन की लंबे समय से चली आ रही रणनीति और जमीनी विस्तार का परिणाम बताया।
शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा भी बंगाल की राजनीति में काफी चर्चित रही है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में की थी। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। ग्रामीण बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही है। हालांकि वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराने के बाद शुभेंदु अधिकारी राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। इसके बाद भाजपा ने उन्हें बंगाल में अपने सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल किया। अब मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ उन्होंने राज्य की राजनीति में एक नया मुकाम हासिल किया है।
पूर्व मेदिनीपुर जिले से आने वाले शुभेंदु अधिकारी पिछले पांच दशकों में पश्चिम बंगाल के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने हैं, जो कोलकाता के पारंपरिक राजनीतिक केंद्र से बाहर किसी जिले से उभरकर सत्ता के शीर्ष पद तक पहुंचे हैं। इससे पहले वर्ष 1970 में अजोय मुख़र्जी ग्रामीण पृष्ठभूमि से मुख्यमंत्री बने थे।
शपथ ग्रहण समारोह को देखते हुए कोलकाता में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। ब्रिगेड परेड ग्राउंड और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। शहर की प्रमुख सड़कों पर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए, ताकि समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
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