उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में रविवार को मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक संरचना पर नजर डालें तो इसमें ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और जाट समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। बीजेपी नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक संतुलन का कील कांटा मजबूत करने की तैयारी है।
छह नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही दो राज्य मंत्रियों को पदोन्नत कर स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी गई। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हुए इस विस्तार को भारतीय जनता पार्टी की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है। पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और मध्य यूपी के साथ-साथ ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, जाट, लोधी और गुर्जर समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया है। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद बदले सामाजिक समीकरणों को देखते हुए इस विस्तार को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को एक बार फिर कैबिनेट में जगह दी गई है। मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र चौधरी जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और संगठन में जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। बीजेपी ने उनके जरिए जाट वोट बैंक को साधने का संदेश दिया है।
रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडे को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए मनोज पांडे राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से अलग हो गए थे। उस समय बीजेपी नेतृत्व की ओर से उन्हें मंत्री पद देने के संकेत मिले थे। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी एंट्री को अवध क्षेत्र में बीजेपी की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत को राज्य मंत्री बनाया गया है। वे लोधी समाज से आते हैं। माना जा रहा है कि मध्य यूपी में लोधी वोट बैंक में आई कमजोरी को देखते हुए पार्टी ने यह कदम उठाया है। कन्नौज, जो समाजवादी पार्टी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, वहां से मंत्री बनाकर बीजेपी ने राजनीतिक संदेश दिया है।
वाराणसी से जुड़े हंसराज विश्वकर्मा को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। वह बीजेपी संगठन में जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके हैं और विश्वकर्मा समाज से आते हैं। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से उनका मंत्री बनना पूर्वांचल और ओबीसी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर को राज्य मंत्री बनाया गया है। वह वाल्मीकि समाज से आते हैं। बीजेपी ने दलित समाज के भीतर गैर-जाटव वर्गों को साधने की रणनीति के तहत उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी है। इसी क्रम में फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान को भी राज्य मंत्री बनाया गया है। पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान के जरिए बीजेपी ने दलित महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश देने की कोशिश की है।
मेरठ दक्षिण से विधायक सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है। वह गुर्जर समाज से आते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय माने जाते हैं। वहीं कानपुर देहात की सिकंदरा सीट से विधायक अजीत सिंह पाल ओबीसी वर्ग की पाल बिरादरी का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों नेताओं का प्रमोशन संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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