सेहत से हरियाली तक: योगी सरकार का सहजन अभियान बनेगा पोषण का पॉवर हाउस

सहजन संग हरियाली का संकल्प: योगी सरकार का पौधरोपण अभियान स्वास्थ्य, पोषण और जैव विविधता का बनेगा प्रतीक


>उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर योगी सरकार एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है। वन महोत्सव-2025 के अंतर्गत 1 जुलाई से शुरू होने जा रहे 35 करोड़ पौधरोपण अभियान में न सिर्फ हरियाली बढ़ेगी, बल्कि इस बार “पोषण के पावरहाउस” सहजन को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है।


>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि पौधरोपण जनांदोलन का रूप ले, ताकि प्रदेश में हरित आवरण वर्ष 2030 तक 20 प्रतिशत तक पहुँचे। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, कृषि उन्नयन और जैव विविधता को भी नया आयाम देना है।

सहजन: पौध नहीं, पोषण और स्वास्थ्य का वरदान


>सहजन को एक दैवीय चमत्कार माना जाता है। इसकी पत्तियों और फलियों में 92 विटामिन्स, 46 एंटी ऑक्सीडेंट, 36 दर्द निवारक तत्व और 18 एमिनो एसिड होते हैं।

सहजन के फायदे: 

  • संतरे से 7 गुना अधिक विटामिन C
  • गाजर से 4 गुना अधिक विटामिन A
  • दूध से 4 गुना अधिक कैल्शियम
  • केले से 3 गुना पोटैशियम
  • और दही से 3 गुना प्रोटीन प्रदान करता है।

पोषण योजना में सहजन की भूमिका


>केंद्र सरकार पहले ही प्रधानमंत्री पोषण योजना में सहजन को शामिल करने के निर्देश राज्यों को दे चुकी है। योगी सरकार इसे प्रदेश में तेजी से लागू कर रही है।


>वर्ष 2024 में सहजन के 55 लाख पौधे लगाए गए थे, और इस बार भी यह संख्या बनी रहने की संभावना है। सीएम योगी ने सहजन के पौधे पीएम आवास योजना के लाभार्थियों, आंगनबाड़ी केंद्रों, और आकांक्षात्मक जिलों के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।


>कृषि और पशुपालन में भी लाभकारी


>सिर्फ इंसान ही नहीं, सहजन का लाभ पशुओं और फसलों को भी मिलता है।

  • हरी पत्तियां खिलाने से दूध में 1.5 गुना और वजन में 1/3 गुना वृद्धि
  • पत्तियों के रस के छिड़काव से फसल की उपज में दुगुनी वृद्धि संभव

वाराणसी स्वास्थ्य विभाग की अनुकरणीय पहल


>वाराणसी में हर हेल्थ सेंटर पर सहजन के दो पौधे लगाए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को सीधे पोषण लाभ मिल सके। यह प्रयास अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बनेगा।

सहजन की खेती और प्रसंस्करण की दिशा में विस्तार


>तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित PKM-1 और PKM-2 किस्में अब यूपी में भी प्रचलन में लाई जा रही हैं। ये कम पानी, गर्म वातावरण और विभिन्न प्रकार की मिट्टी में आसानी से उगाई जा सकती हैं।


 

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