>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के अन्नदाताओं को खरीफ सीजन में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए खाद वितरण की व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में उन्होंने दो टूक कहा कि "किसानों को समय पर और समुचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।" जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद की आपूर्ति, वितरण और भंडारण की हर स्तर पर सघन निगरानी करें।
>‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की चेतावनी: जमाखोरी और तस्करी पर चलेगा बुलडोज़र
>मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि खाद की जमाखोरी या कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था किसानों के अधिकारों पर डाका डालेगी, उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, थोक और खुदरा विक्रेताओं के स्टॉक की नियमित जांच और गड़बड़ी की स्थिति में लाइसेंस रद्द करने तक का निर्देश भी दिया गया है।
>हर बोरी पर नजर: डिजिटल निगरानी और स्थानीय संवाद प्रणाली होगी मजबूत
>सीएम योगी ने निर्देश दिए कि किसानों को यह साफ जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए कि खाद कहां और किस कीमत पर मिल रही है। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, कृषि विभाग की वेबसाइट और स्थानीय मीडिया का सक्रिय उपयोग किया जाएगा। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि फर्जीवाड़ा और मुनाफाखोरी पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
>आपूर्ति व्यवस्था में लचीलापन, हर जिले में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार
>मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में खाद की कमी की सूचना मिलती है तो तत्काल वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था की जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों को खाद की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने का भी निर्देश दिया ताकि किसी स्तर पर चूक की गुंजाइश न रहे।
>कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती का संकल्प
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार किसान हैं। उनकी सुविधा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि खाद की उपलब्धता, गुणवत्ता और कीमत की हर स्तर पर निगरानी होगी, ताकि अन्नदाता को कोई असुविधा न हो।
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