>उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के खिलाफ एक के बाद एक कड़े कदम उठाते हुए यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब कोई भी अधिकारी या चिकित्सक जवाबदेही से नहीं बच सकेगा। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के नेतृत्व में हुई इस बड़ी कार्रवाई के तहत कानपुर के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (ACMO) डॉ. सुबोध प्रकाश यादव को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही मथुरा और एटा जिले के दो अन्य चिकित्साधिकारियों पर भी भर्ती प्रक्रिया में रिश्वतखोरी के आरोपों में कार्रवाई की गई है।
>डॉ. सुबोध यादव पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। जांच में सामने आया कि उन्होंने जेम पोर्टल और दस्तावेजों में हेराफेरी कर जेएम फार्मा नामक फर्म के साथ मिलीभगत कर 1.60 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया। सीबीआई की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उन्होंने चीफ फार्मासिस्ट और वरिष्ठ वित्त अधिकारी के साथ मिलकर अधोमानक सामग्री की आपूर्ति को मंज़ूरी दी थी। इस पर कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
>भर्ती प्रक्रिया में घूसखोरी का खुलासा
मथुरा के डॉ. हरि नारायण प्रभाकर और एटा के डॉ. राहुल वार्ष्णेय पर यूपी पुलिस भर्ती में मेडिकल जांच के दौरान घूस लेने के गंभीर आरोप हैं। जांच के बाद इन दोनों को भी निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
>अनियमितताओं के चलते अन्य डॉक्टरों पर भी गिरी गाज
बदायूं जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल श्रीवास्तव पर सीएमओ रहते हुए आशा चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। यह मामला विधानसभा तक पहुंचा, जिसके बाद जांच में दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
>जनता दर्शन से शुरू हुई कार्रवाई की चिंगारी
लखनऊ के वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेनू पंत पर भी मरीजों की अनदेखी और आदेशों की अवहेलना के आरोपों में विभागीय कार्रवाई शुरू हुई। जनता दर्शन के दौरान मिली शिकायतों के बाद उप मुख्यमंत्री ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कराया, जिसमें कई खामियां सामने आईं।
>सीतापुर मामले में सख्ती
सीतापुर जिले में फर्श पर प्रसूता महिला और नवजात को लेटाकर इलाज करने की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
>नेत्र सर्जन भी जांच के घेरे में
हमीरपुर जिला चिकित्सालय के नेत्र सर्जन डॉ. अनिल कुमार सिंह पर मरीजों की अनदेखी और स्पष्टीकरण न देने के चलते विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
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