फर्जी परमिट से पार कर रहीं थीं अंतरराष्ट्रीय सीमा - योगी सरकार ने पकड़ा करोड़ों का खेल

भारत-नेपाल सीमा पर बस परमिट घोटाला: योगी सरकार की सख्ती, तीन जिलों में FIR, STF जांच की सिफारिश
News Desk 16 Jul 2025, 03:24 AM 1 min read
फर्जी परमिट से पार कर रहीं थीं अंतरराष्ट्रीय सीमा - योगी सरकार ने पकड़ा करोड़ों का खेल


>लखनऊ - भारत-नेपाल सीमा पर जाली परमिट के ज़रिए चल रही निजी बसों की अवैध आवाजाही पर अब योगी सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। परिवहन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ कि कई निजी बसें फर्जी परमिट के सहारे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर रही थीं। मामला सामने आते ही परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने न सिर्फ तीन जिलों—अलीगढ़, बागपत और महराजगंज—में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए, बल्कि डीजीपी को पत्र भेजकर एसटीएफ से जांच कराने की भी अनुशंसा की है।


>फर्जीवाड़े का पर्दाफाश


>एफआरआरओ लखनऊ और एसएसबी द्वारा जानकारी मिलने के बाद जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि कई बसों के परमिट सतही तौर पर वैध प्रतीत हो रहे थे, लेकिन हकीकत में ये पूरी तरह जाली और क्षेत्राधिकार से बाहर जारी किए गए थे। जांच में ऐसे परमिट पाए गए जो न तो संबंधित परिवहन कार्यालय से जारी हुए थे और न ही वैध श्रेणी में आते हैं।


>तीन जिलों में हुई पुष्टि, कई जिलों में संदिग्ध परमिट


>अब तक तीन जिलों में फर्जी परमिट की पुष्टि हो चुकी है, और गोरखपुर, इटावा, और औरैया जैसे अन्य जिलों में भी इसी तरह के संदिग्ध परमिट पेश किए गए हैं। गोरखपुर मामले में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


>वैधानिक स्थिति और तकनीकी खामी


>परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि भारत-नेपाल यात्री यातायात समझौता 2014 के तहत केवल Form-C, जो संबंधित देश की दूतावास या कांसुलेट द्वारा जारी होता है, वही अंतरराष्ट्रीय परमिट के रूप में मान्य होता है। राज्य स्तर पर जारी SR-30 या SR-31 फॉर्म इस रूट पर वैध नहीं हैं।


>VAHAN 4.0 पोर्टल में भी तकनीकी खामी सामने आई, जिसमें मैन्युअल रूप से “वाया नेपाल” जैसी प्रविष्टियां डालकर परमिट जनरेट किए गए। विभाग ने NIC को निर्देशित किया था कि ड्रॉपडाउन विकल्पों को सीमित किया जाए, लेकिन ये बदलाव आंशिक रूप से ही लागू हुए।


>भारत सरकार को भेजा गया अनुरोध


>उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने भारत सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि विदेश मंत्रालय (MEA) Form-C परमिटों की केंद्रीय सूची बनाए और सभी प्रवर्तन एजेंसियों को उपलब्ध कराए। साथ ही NIC द्वारा एक रीयल-टाइम सत्यापन पोर्टल भी विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

"जाली दस्तावेजों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और फेसलेस परमिट प्रणाली में जरूरी तकनीकी सुधार के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।" ब्रजेश नारायण सिंह, परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश

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