>लखनऊ, 24 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल में डिजिटल शासन की नई दिशा साफ नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत योगी सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़कर कार्यकुशलता और पारदर्शिता में अभूतपूर्व सुधार किया है। समाज कल्याण विभाग इस बदलाव का अग्रणी चेहरा बनकर उभरा है।
>समाज कल्याण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण ले रहे हैं। सितंबर 2025 तक कुल 3,900 अधिकारी और कर्मचारी पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्होंने 21,150 ऑनलाइन कोर्स पूरे किए। इनमें लगभग 15,893 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है। प्रशिक्षण से न केवल कर्मचारियों की दक्षता बढ़ी है, बल्कि सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत हुई है।
>प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया है। ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’ जैसे पाठ्यक्रम तनावमुक्त कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देते हैं, जबकि POSH Act 2013 से कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा ‘Procurement Process on GeM’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’, ‘Basics of Artificial Intelligence’ और ‘Right to Information Act’ जैसे कोर्स सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, तकनीकी कुशलता और जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ा रहे हैं।
>मिशन कर्मयोगी के तहत डिजिटल प्रशिक्षण योगी सरकार के उस दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें शासन को पेपरलेस, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना जगाने में उल्लेखनीय सफलता पाई है।
>समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि डिजिटल प्रशिक्षण के जरिए अधिकारी और कर्मचारी जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बन रहे हैं। दक्षता से सेवा की गुणवत्ता बढ़ रही है और यही योगी सरकार के सुशासन का आधार है। उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोगी के प्रभाव से सरकारी सेवाएं तेज, पारदर्शी और प्रभावी बन रही हैं, जिससे जनता को योजनाओं का लाभ अधिक सहजता और भरोसे के साथ मिल रहा है।
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