>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से दिल्ली तक निकली ‘श्री तेग बहादुर संदेश यात्रा’ केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक चेतावनी का प्रतीक बन गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक यात्रा का न केवल भव्य स्वागत किया, बल्कि उस मंच से एक निर्णायक संदेश भी दिया - अवैध धर्मांतरण के खिलाफ अब और सख्ती होगी, साजिशें होंगी नाकाम!
>मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि समाज को तोड़ने और धार्मिक सौहार्द को चोट पहुंचाने वाली ताकतों के खिलाफ उनकी सरकार कोई नरमी नहीं बरतेगी। अनुसूचित जाति के लोगों को लालच और डर के बल पर धर्मांतरण के लिए मजबूर करना न सिर्फ संविधान, बल्कि भारत की सामाजिक आत्मा के खिलाफ है।
>अवैध धर्मांतरण: विदेशी फंडिंग और नेटवर्क का पर्दाफाश
>सीएम योगी ने खुलासा किया कि हाल ही में बलरामपुर में एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें विदेशों से पैसे मंगाकर धर्मांतरण कराने की साजिश की जा रही थी। अब तक 40 खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया है, जो धर्मांतरण की ‘रेटिंग सिस्टम’ का संकेत देता है।
>यह आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के लिए भी गहरा खतरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये घटनाएं केवल अपराध नहीं, राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र हैं, जिन्हें जड़ से समाप्त करना होगा।
>गुरु तेग बहादुर की शहादत: प्रेरणा और प्रतिरोध का प्रतीक
>श्री तेग बहादुर संदेश यात्रा का उद्देश्य गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान की गाथा को जन-जन तक पहुँचाना है। यह यात्रा लखनऊ से प्रारंभ होकर कानपुर, इटावा, आगरा होते हुए दिल्ली के शीशगंज गुरुद्वारा तक जाएगी— वही स्थल जहां गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब के अत्याचार के विरुद्ध अपनी आहुति दी थी।
>सीएम योगी ने इस अवसर पर कहा कि "सिख गुरुओं की बलिदान परंपरा भारतीय संस्कृति की रक्षा की रेखा है। यह संदेश यात्रा हमें उनकी अमर गाथा से जोड़ने का माध्यम है।"
>सांस्कृतिक चेतना बनाम षड्यंत्रकारी ताकतें
>सीएम योगी ने कहा कि कुछ ताकतें हिंदू और सिखों के बीच फूट डालने का प्रयास करती रही हैं, लेकिन हमें सतर्क रहकर ऐसी कोशिशों को नाकाम करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति अपनी धर्म-संस्कृति को दबाव में आकर न छोड़े, यही उनके सरकार की प्राथमिकता है।
>"वीर बाल दिवस" और राष्ट्र स्तर की मान्यता
>सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में राष्ट्रीय मान्यता दिए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह हमारे शहीद बच्चों और गुरुओं को सम्मान देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
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