>आज जब दुनिया आर्थिक विकास के नए रास्ते तलाश रही है, भारत का धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। विकसित देशों में जहां टूरिज्म सेक्टर जीडीपी का 10% तक योगदान देता है, वहीं भारत अभी सिर्फ 2-3% पर है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार की नीतियां इसे अगले पांच वर्षों में तीन से चार गुना तक ले जा सकती हैं।
>2023 में रिकॉर्ड पर्यटक, यूपी बना सबसे पसंदीदा धार्मिक गंतव्य
>2023 में भारत ने 1.88 करोड़ विदेशी और 250 करोड़ घरेलू पर्यटकों की मेज़बानी की। इसमें उत्तर प्रदेश का योगदान उल्लेखनीय रहा है। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से वाराणसी में पर्यटकों की संख्या 50 लाख से बढ़कर 6 करोड़ हो गई। अयोध्या में 2016 में जहाँ सिर्फ 2.83 लाख पर्यटक आए थे, वहीं अब यह आंकड़ा 13.44 करोड़ पार कर चुका है।
>होटल इंडस्ट्री में बूम: अगले 7 साल में 10 लाख कमरों की जरूरत
>देश में धार्मिक पर्यटन की तेज़ी को देखते हुए अगले सात सालों में 10 लाख नए होटल रूम्स की जरूरत होगी। इससे 35 लाख से अधिक रोजगार सृजित हो सकते हैं, जिनमें से 15-20 लाख नौकरियाँ छोटे शहरों में होंगी। यह न सिर्फ होटल इंडस्ट्री को, बल्कि इससे जुड़े एविएशन, रेलवे, ट्रांसपोर्ट और ओडीओपी जैसे लोकल इकोनॉमी को भी बल देगा।
>हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बना अर्थव्यवस्था का नया इंजन
>एसोसिएशन ऑफ इंडिया की 2024 रिपोर्ट के अनुसार अगले 5-7 साल में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर जीडीपी में 8% तक योगदान देने लगेगा और 10% रोजगार सृजन का केंद्र बनेगा। यूपी के चित्रकूट, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल जैसे क्षेत्रों में पर्यटन का लाभ सीधा स्थानीय जनता को मिलेगा।
>धार्मिक पर्यटन: संस्कृति से अर्थव्यवस्था तक
>धार्मिक पर्यटन न केवल रोज़गार और आय का साधन बन रहा है, बल्कि यह संस्कृति, विरासत और अध्यात्म के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम भी है। बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षा, सुविधाएं, और सरकार की योजनाओं के कारण भारत खासकर उत्तर प्रदेश, आने वाले वर्षों में वैश्विक धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें