>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) छात्रों के उत्थान में एक नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार ने ओबीसी छात्रों के सशक्तीकरण और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में जो कदम उठाए हैं, वे न केवल ऐतिहासिक हैं बल्कि एक विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव भी रख रहे हैं।
>शुक्रवार को योगी सरकार ने 10,28,205 से अधिक छात्र-छात्राओं के खातों में 300 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी। इनमें 4,83,000 से अधिक ओबीसी छात्रों को 126.69 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी गई। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से जोड़ा जाए।
>2016-17 तक जहां केवल 46 लाख छात्र स्कॉलरशिप का लाभ ले पा रहे थे, वहीं योगी सरकार के आने के बाद यह संख्या बढ़कर 62 लाख तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि योगी सरकार ने न केवल छात्रवृत्ति योजना का विस्तार किया बल्कि वितरण प्रणाली को भी पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया।
>डीबीटी प्रणाली की वजह से इस बार अनुसूचित जाति-जनजाति, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक छात्रों को भी समय पर सहायता मिली —
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अनुसूचित जाति/जनजाति के 3,56,000 छात्रों को 114.92 करोड़ रुपये,
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सामान्य वर्ग के 97,000 छात्रों को 29.18 करोड़ रुपये,
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अल्पसंख्यक वर्ग के 90,758 छात्रों को 27.16 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई।
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>पिछले आठ वर्षों में योगी सरकार ने ओबीसी छात्रों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
वर्ष 2024-25 में ही 32,22,499 ओबीसी छात्रों को स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति दी गई।
2017 से अब तक 2.07 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 13,535.33 करोड़ रुपये का सीधा लाभ मिला है।
>यह राशि पूर्ववर्ती सरकार के 4,197 करोड़ रुपये के खर्च से चार गुना अधिक है।
इन लाभार्थियों में बड़ी संख्या ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के छात्रों की है, जो अब उच्च शिक्षा, तकनीकी और पेशेवर कोर्सों में दाखिला लेकर आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि “शिक्षा ही सामाजिक समानता की कुंजी है।” ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में कदम है बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के विजन का अभिन्न हिस्सा भी है। योगी सरकार की स्कॉलरशिप नीति ने न केवल आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को राहत दी है बल्कि उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया है। ग्रामीण युवाओं को तकनीकी, चिकित्सा और उच्च शिक्षा में अवसर मिलना प्रदेश की सामाजिक संरचना में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।
>पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने डीबीटी प्रणाली के जरिए यह सुनिश्चित किया है कि हर छात्र तक लाभ बिना बिचौलियों के, सीधे खाते में पहुंचे।
यह पहल ओबीसी छात्रों में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सामाजिक गौरव की भावना को मजबूत कर रही है।
>पिछड़ा वर्ग कल्याण व दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा -- “योगी सरकार ने ओबीसी और दिव्यांगजनों के लिए खजाना खोल दिया है। हमारा लक्ष्य है कि शिक्षा के माध्यम से पिछड़ों को सशक्त बनाकर सामाजिक समानता सुनिश्चित की जाए। यही ‘विकसित यूपी’ की असली पहचान बनेगा।”
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