>रामनगरी अयोध्या एक बार फिर रोशनी, श्रद्धा और संस्कृति के संगम से जगमगाने को तैयार है। इस बार का नवम दीपोत्सव 2025 न सिर्फ दीयों की भव्यता का प्रतीक होगा, बल्कि भारतीय लोककला, परंपरा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम भी बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इस दीपोत्सव को कला और संस्कृति के उत्सव के रूप में बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस वर्ष का मुख्य आकर्षण होगा — राम की पैड़ी पर 80 हजार दीयों से सजी अद्भुत रंगोली, जो श्रद्धा, सौंदर्य और भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करेगी।
>अयोध्या दीपोत्सव के इतिहास में पहली बार राम की पैड़ी पर इतनी विशाल “दीप-रंगोली” बनाई जा रही है। यह पारंपरिक ‘चौक पूरने’ की कला पर आधारित है, जिसमें मिट्टी के दीयों, फूलों और प्राकृतिक रंगों का त्रिवेणी संगम देखने को मिलेगा। ऊपर से देखने पर यह दृश्य ऐसा प्रतीत होगा मानो स्वयं धरती श्रीराम के आगमन की तैयारी में सजी हो।
>इस रंगोली की डिजाइन में तीन प्रमुख प्रतीक शामिल हैं -- कलश (समृद्धि का प्रतीक), स्वास्तिक (शुभता का संकेत) और कमल पुष्प (भक्ति और पवित्रता का प्रतीक)। प्रत्येक दीया और हर रंग इस पवित्र आयोजन में श्रद्धा और संस्कृति की कहानी कहेगा। राम की पैड़ी पर बन रही यह अद्भुत रंगोली डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के कला विभाग की 50 छात्राओं की रचनात्मक मेहनत का परिणाम है। इन छात्राओं ने मिलकर इस रंगोली के हर हिस्से की रूपरेखा, पैटर्न और रंग संयोजन को बारीकी से तैयार किया है।
>कला विभाग की संयोजक डॉ. सरिता द्विवेदी के अनुसार -- “यह केवल कला नहीं, बल्कि हमारे लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है। हर दीया हमारी आस्था का प्रतीक है और हर रंग हमारी भावना का विस्तार।”
>रंगोली निर्माण में स्थानीय कारीगरों की मदद से पारंपरिक गेरू, चावल के आटे और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया गया है। संध्या के समय जब सूर्य अस्त होगा और दीये प्रज्वलित होंगे, तब पूरी रंगोली ऐसा आभास देगी जैसे धरती पर स्वयं देवताओं ने दीप जलाए हों।
>योगी सरकार ने दीपोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ‘कला और संस्कृति के महोत्सव’ में परिवर्तित कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश है -- “दीपोत्सव केवल दीयों का पर्व नहीं, बल्कि अयोध्या की आत्मा को जगमगाने का उत्सव है।” अयोध्या अब केवल धार्मिक नगरी नहीं रही, बल्कि भारतीय लोककला और परंपरा की विश्व सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उभर रही है।
>दीपोत्सव की रात जब राम की पैड़ी पर 80 हजार दीये एक साथ प्रज्वलित होंगे, तो दृश्य ऐसा होगा मानो आकाश के तारे धरती पर उतर आए हों। उस क्षण अयोध्या के हर कोने में गूंजेगा -- “जय श्रीराम!”
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