>उत्तर प्रदेश में लगातार हो रहे विद्युत हादसों और बढ़ते जनहानि को रोकने के लिए पावर कारपोरेशन ने बड़ा कदम उठाया है। अब किसी भी लापरवाही की कीमत न केवल संविदा कर्मियों को बल्कि संबंधित अधिकारियों को भी चुकानी होगी।
>पावर कारपोरेशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सुरक्षा उपकरणों के बिना या प्रशिक्षण की कमी के चलते कोई हादसा होता है तो जिम्मेदारी सीधे अवर अभियंता (जेई), सहायक अभियंता (एई) और अधिशासी अभियंता (ईई) तक तय होगी। यानी अब अफसर भी विद्युत दुर्घटनाओं के लिए सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। गौरतलब है कि पिछले वर्ष विद्युत हादसों में 1123 लोगों की मौत हो चुकी है। यही कारण है कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने गुरुवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
>संविदा कर्मियों को सुरक्षा उपकरणों के साथ ही कार्य करने की अनुमति होगी। संविदा एजेंसियों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कर्मचारी हेलमेट, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट और अन्य उपकरण पहनकर ही लाइन व सिस्टम पर काम करें।
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33/11 केवी उपकेंद्रों पर कार्य करने से पहले हर गैंग को लिखित रूप से उपस्थिति दर्ज करनी होगी।
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कार्य शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि गैंग के पास सभी सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं।
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शटडाउन लिए बिना किसी भी लाइन पर काम नहीं होगा।
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अकुशल श्रमिकों से लाइन का अनुरक्षण कार्य नहीं लिया जाएगा।
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>सभी डिस्काम को पावर कारपोरेशन ने 11 तरह के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए हैं, जिनमें शामिल हैं:
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विद्युत सुरक्षा हेलमेट (एचवी सेंसर व टॉर्च के साथ)
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33 केवी व 11 केवी के लिए सुरक्षा दस्ताने
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इलेक्ट्रिकल सेफ्टी शूज
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अर्थ मैट
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सेफ्टी बेल्ट व हार्नेस
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अर्थ डिस्चार्ज रॉड
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ब्रास अर्थ चेन (30 फीट)
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एलवी टेस्टर (नीयोन)
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टूल किट
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रेडियम जैकेट
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>पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने साफ कहा है कि सुरक्षा में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता पर यह जिम्मेदारी होगी कि सभी स्तरों पर सुरक्षा निर्देशों का पालन हो।
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