उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक व्यक्ति की हत्या और उसके शव को घर के बाथरूम में दफनाने के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, सिकंदरा थाना क्षेत्र की रेणुका धाम कॉलोनी में रहने वाले सुरेंद्र शर्मा कई सप्ताह से लापता थे। उनकी गुमशुदगी दर्ज होने के बाद शुरू हुई जांच के दौरान पुलिस ने घर के बाथरूम से उनका शव बरामद किया और उनकी पत्नी रूबी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी महिला ने हत्या के बाद शव को घर के भीतर ही छिपाने की योजना बनाई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने कथित तौर पर इंटरनेट पर शव छिपाने के तरीके खोजे और क्राइम आधारित टीवी कार्यक्रम भी देखे थे। इन दावों की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, सुरेंद्र शर्मा की हत्या 18 मई को हुई थी। इसके कुछ दिन बाद 26 मई को उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट सिकंदरा थाने में दर्ज कराई गई। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को घर के भीतर ही संदेहास्पद परिस्थितियां मिलीं। इसके बाद बाथरूम की खुदाई कराई गई, जहां से शव बरामद हुआ। मामले का खुलासा 3 जुलाई को किया गया।
पुलिस का कहना है कि गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद भी आरोपी महिला लगातार अलग-अलग लोगों को सुरेंद्र के लापता होने के अलग-अलग कारण बताती रही। कभी उसने कहा कि सुरेंद्र घर से रुपये लेकर चले गए, तो कभी कहा कि वह अचानक कहीं निकल गए। जांच के दौरान इन बयानों में कथित विरोधाभास सामने आने के बाद पुलिस का संदेह गहराया।
रेणुका धाम कॉलोनी के स्थानीय लोगों के अनुसार, सुरेंद्र शर्मा अपने परिवार के साथ कई वर्षों से इस मकान में रह रहे थे। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार का सामाजिक मेलजोल सीमित था और घर का मुख्य गेट अक्सर बंद रहता था। कई लोगों ने यह भी बताया कि पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद की आवाजें अक्सर सुनाई देती थीं।
हालांकि, पड़ोसियों ने कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि घर के भीतर इतनी गंभीर घटना हो चुकी है। सुरेंद्र के लापता होने के बाद भी किसी को घर के अंदर जाने का अवसर नहीं मिला।
जांच अधिकारियों के अनुसार, गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद आरोपी महिला पुलिस के साथ खोजबीन में भी शामिल होती रही। पुलिस का आरोप है कि उसने परिजनों और पड़ोसियों को अलग-अलग बातें बताकर मामले को सामान्य गुमशुदगी का रूप देने की कोशिश की।
पुलिस का यह भी कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर हत्या के बाद सबूत छिपाने की योजना की जानकारी सामने आई है। इन दावों की पुष्टि के लिए डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कुछ समय से अपराध आधारित कार्यक्रम देख रही थी और इंटरनेट पर यह जानकारी भी खोज रही थी कि शव को कैसे छिपाया जा सकता है। पुलिस का दावा है कि इसी आधार पर उसने शव को घर के भीतर ही दफनाने की योजना बनाई ताकि किसी को संदेह न हो। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी तथा उनकी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और अन्य तथ्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर के अनुसार, ऐसी घटनाएं सामान्य नहीं होतीं। उनका कहना है कि कई मामलों में गहरे मानसिक तनाव या आघात की स्थिति में लोग गंभीर और गलत निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच आवश्यक होती है।
पुलिस का कहना है कि मामले में सभी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है। फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर आरोपपत्र तैयार किया जाएगा। मामले की जांच जारी है।
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