लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं और अन्य प्रवक्ताओं के साथ बैठक की। चुनावी माहौल के बीच हुई इस बैठक में पार्टी की ओर से सार्वजनिक मंचों, टेलीविजन डिबेट और सोशल मीडिया पर रखे जाने वाले पक्ष को लेकर चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय और राजकुमार भाटी समेत पार्टी के अन्य प्रवक्ता शामिल रहे।
करीब दो घंटे चली बैठक में अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं से कहा कि किसी भी डिबेट में शामिल होने से पहले संबंधित विषय की पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने बिना तैयारी के बहस में जाने से बचने की सलाह दी। बैठक में सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले छोटे वीडियो और बयानों को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही गई।
बैठक में अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं से कहा कि किसी मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं होने पर उस पर बोलने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी मामले में पार्टी का पक्ष रखने से पहले उससे जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाना जरूरी है। प्रवक्ताओं की भूमिका को लेकर हुई चर्चा में यह बात सामने रखी गई कि टेलीविजन डिबेट में कही गई बात सार्वजनिक रूप से सामने आती है। ऐसे में किसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी पृष्ठभूमि और उपलब्ध तथ्यों को समझना जरूरी है। अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं को यह भी सलाह दी कि बिना तैयारी के किसी बहस में शामिल होने से बचें। उनका जोर इस बात पर रहा कि पार्टी की ओर से सार्वजनिक रूप से रखे जाने वाले पक्ष में तथ्य और पार्टी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
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बैठक में प्रवक्ताओं को यह भी कहा गया कि पार्टी की ओर से हर मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है। यदि किसी विषय की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है तो उस पर तत्काल टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी गई। प्रवक्ताओं के लिए सार्वजनिक मंच पर बयान देते समय विषय की जानकारी, शब्दों के चयन और पार्टी के आधिकारिक पक्ष को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि कई मामलों में प्रतिक्रिया देने के बजाय चुप रहना भी एक विकल्प हो सकता है। इस चर्चा का एक प्रमुख हिस्सा टीवी डिबेट और अन्य सार्वजनिक मंचों पर प्रवक्ताओं की जिम्मेदारी से जुड़ा रहा। पार्टी के प्रवक्ताओं को संबंधित मुद्दे की जानकारी जुटाकर ही अपना पक्ष रखने की सलाह दी गई।
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अखिलेश यादव ने जाति और धर्म से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने प्रवक्ताओं को ऐसे मुद्दों पर बोलते समय भाषा और शब्दों के चयन का ध्यान रखने की सलाह दी, जिनसे किसी की भावनाएं आहत हो सकती हैं। ऐसे विषयों पर सार्वजनिक बयान देते समय संयमित भाषा के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। बैठक में प्रवक्ताओं को यह समझने की सलाह दी गई कि किसी संवेदनशील विषय पर कही गई बात सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन सकती है। पार्टी की ओर से सार्वजनिक मंचों पर रखे जाने वाले विचारों में विषय की प्रकृति और उसके सामाजिक संदर्भ को ध्यान में रखने की बात भी बैठक के दौरान कही गई।
बैठक में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले छोटे वीडियो और रील को लेकर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने कहा कि प्रवक्ताओं के बयान तेजी से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो सकते हैं और 10 सेकेंड की रील भी पार्टी की छवि बनाने या बिगाड़ने में भूमिका निभा सकती है। सोशल मीडिया के मौजूदा दौर में टेलीविजन डिबेट या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिया गया बयान केवल उसी मंच तक सीमित नहीं रहता। बयान के छोटे हिस्से को वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर साझा किया जा सकता है। इसी संदर्भ में प्रवक्ताओं को डिबेट और सार्वजनिक बयान देते समय अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई। बैठक में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री के प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई।
बैठक में यह बात भी रखी गई कि किसी प्रवक्ता की ओर से टेलीविजन डिबेट या सोशल मीडिया पर कही गई बात को केवल व्यक्तिगत टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाता। उसे अक्सर पार्टी के रुख से जोड़कर देखा जा सकता है। इसी वजह से प्रवक्ताओं को तथ्यों और पार्टी की आधिकारिक लाइन के आधार पर अपनी बात रखने की सलाह दी गई। संबंधित मुद्दे की जानकारी हासिल करने के बाद ही सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने पर जोर दिया गया। इस दौरान भाषा, शब्दों और विषय की जानकारी को प्रवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। खासकर संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
समाजवादी पार्टी में चुनावी माहौल को देखते हुए संगठन स्तर पर गतिविधियां जारी हैं। इसी क्रम में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं के साथ बैठक कर सार्वजनिक संवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के साथ पार्टी के अन्य प्रवक्ता भी शामिल रहे। करीब दो घंटे चली इस बैठक में डिबेट में भाग लेने, मुद्दों की जानकारी रखने, सोशल मीडिया पर बयानों के प्रसार और संवेदनशील मुद्दों पर भाषा के इस्तेमाल से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा हुई। प्रवक्ताओं को पार्टी की ओर से किसी मुद्दे पर पक्ष रखते समय आधिकारिक स्थिति और उपलब्ध तथ्यों को आधार बनाने की सलाह दी गई।
राजनीतिक दलों के प्रवक्ता टीवी डिबेट, प्रेस वार्ता और सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों पर पार्टी का पक्ष रखते हैं। ऐसे में उनके बयान सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनते हैं। बैठक में इसी सार्वजनिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए प्रवक्ताओं को तैयारी के साथ डिबेट में शामिल होने और संवेदनशील विषयों पर सावधानी से बोलने की सलाह दी गई। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर छोटे वीडियो के तेजी से प्रसारित होने के संदर्भ में भी प्रवक्ताओं को सतर्क रहने को कहा। पार्टी अध्यक्ष की ओर से दी गई सलाह में मुख्य रूप से तथ्यों की जानकारी, तैयारी, भाषा और पार्टी के आधिकारिक पक्ष के अनुरूप बयान रखने पर जोर रहा।
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