इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मॉब लिंचिंग पीड़ितों को नहीं दी राहत, PIL खारिज कर दिया बड़ा संदेश

हाईकोर्ट से झटका: मॉब लिंचिंग रोकने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज, सरकार की कार्रवाई पर जताया भरोसा
News Desk 16 Jul 2025, 01:46 AM 1 min read
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मॉब लिंचिंग पीड़ितों को नहीं दी राहत, PIL खारिज कर दिया बड़ा संदेश


>प्रयागराज - मॉब लिंचिंग जैसे संवेदनशील विषय पर दाखिल जनहित याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से दाखिल इस याचिका में राज्य सरकार को दिशा-निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह मॉब लिंचिंग की घटनाओं से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए, पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार की अब तक की कार्रवाई संतोषजनक है।


>यह फैसला जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा मॉब लिंचिंग पर उठाए गए कदमों और प्रस्तुत जवाब से संतुष्टि जताई और याचिका को "पोषणीय नहीं" मानते हुए खारिज कर दिया।


>क्या थी याचिका की प्रमुख मांगें?


>जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से अधिवक्ताओं सैयद अली मुर्तज़ा, सीमाब कय्यूम और रज़ा अब्बास के माध्यम से दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट के तहसीन पूनावाला बनाम भारत संघ (2018) के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में भीड़ हिंसा की घटनाओं को रोकने और प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।


>याचिका में मांगा गया था कि:


    >
  • प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।

  • डीजीपी को निर्देश दिया जाए कि वे पिछले 5 वर्षों की मॉब लिंचिंग घटनाओं की स्थिति रिपोर्ट पेश करें।

  • फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन हो ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो।

  • मुआवजा योजना के तहत पीड़ितों को लाभ मिले, विशेष रूप से मई 2025 में अलीगढ़ में हुई घटना के शिकार लोगों को 15 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।

  • पुलिस खुफिया इकाइयों और नोडल अधिकारियों की तिमाही बैठकों के ब्योरे पेश किए जाएं।


>सरकार की दलील और हाईकोर्ट का फैसला


>राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए बताया कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर पहले से प्रभावी कार्रवाई हो रही है और कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट होते हुए याचिका को "जनहित में पोषणीय नहीं" मानते हुए खारिज कर दिया।

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