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सत्य निकेतन में फिर इमारत हादसा, पुराने हादसे के बाद भी नहीं थमा सिलसिला

करीब 80 गज के प्लॉट पर बनी चार मंजिला इमारत में पीजी संचालित था; कई लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच पुलिस, एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस मौके पर।
Bureau
Bureau News Desk
06 Sep 2026
07:25 PM
1 min read
सत्य निकेतन में फिर इमारत हादसा, पुराने हादसे के बाद भी नहीं थमा सिलसिला
हाइलाइट्स
दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को चार मंजिला इमारत ढह गई।
मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है।
पुलिस, एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं।
करीब 80 गज के प्लॉट पर बनी इमारत में भूतल समेत चार मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी के रूप में हो रहा था।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक इमारत ढह गई। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है। सूचना मिलते ही पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक मौके पर पहुंचे। बचाव कार्य में बाधा न आए, इसके लिए आसपास का क्षेत्र खाली कराया गया और मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले चार वर्षों में इसी इलाके में इमारत से जुड़ी यह दूसरी बड़ी घटना बताई गई है। इससे पहले 25 अप्रैल 2022 को एक पुरानी तीन मंजिला इमारत में अवैध मरम्मत कार्य के दौरान हादसा हुआ था। उस घटना में दो मजदूरों की मौत हो गई थी।

रविवार को इमारत ढहने की सूचना मिलने के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबा हटाने के लिए हाथों से भी काम किया जा रहा है, ताकि उसके नीचे फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

यह खबर भी पढ़े - दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढही, हादसे में 3 की मौत

आसपास की जगह को खाली कराया गया है, जिससे राहत और बचाव टीमों को काम करने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके। हादसे के बाद प्राथमिकता मलबे में फंसे संभावित लोगों को तलाशने और उन्हें बाहर निकालने की है।

दिए गए विवरण के अनुसार, हादसे में ढही इमारत करीब 80 गज के प्लॉट पर बनी थी। इसमें भूतल के अलावा चार मंजिलें थीं। प्रत्येक मंजिल पर पांच कमरे बताए गए हैं। इस हिसाब से पूरी इमारत में करीब 25 कमरे थे। इमारत का इस्तेमाल पीजी के तौर पर किया जा रहा था।

सत्य निकेतन में इससे पहले 25 अप्रैल 2022 को एक पुरानी तीन मंजिला इमारत में हादसा हुआ था। उस समय इमारत में अवैध मरम्मत कार्य चल रहा था। हादसे में दो मजदूरों की मौत हुई थी।

दिए गए विवरण के मुताबिक, नगर निगम की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बावजूद काम नहीं रोका गया था। घटना के बाद मामले की जांच भी हुई थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच के बाद किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई।

चार साल के भीतर उसी इलाके में दोबारा इमारत ढहने की घटना सामने आने के बाद पुराने हादसे का संदर्भ फिर सामने आया है। वर्तमान घटना में बचाव अभियान जारी है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

सत्य निकेतन की घटना से पहले दक्षिणी दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में भी पांच मंजिला मकान ढहने का हादसा हुआ था। इस घटना में छह लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।

दिए गए विवरण में सैदुलाजाब की घटना को राजधानी में इमारतों के गिरने की घटनाओं के संदर्भ में प्रमुख हादसों में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों ने ऐसे हादसों के पीछे अवैध निर्माण, तय मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही जैसे कारणों का उल्लेख किया है।

हालांकि, सत्य निकेतन में रविवार को हुई घटना के कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इसलिए मौजूदा हादसे की वजह के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी उचित नहीं है।

राजधानी में इमारत गिरने की घटनाओं के बाद पुरानी और जर्जर इमारतों के सर्वे, अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। दिए गए विवरण के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय इमारतों की स्थिति और निर्माण गतिविधियों की नियमित निगरानी जरूरी है।

स्रोत सामग्री में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में हादसे के बाद अधिकारियों का निलंबन, जांच समिति का गठन और मुआवजे की प्रक्रिया सामने आती है, लेकिन पुरानी तथा जर्जर इमारतों का सर्वे प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू नहीं हो पाने का आरोप लगाया जाता है।

सत्य निकेतन की मौजूदा घटना के संदर्भ में यह पहलू इसलिए सामने आया है क्योंकि इसी इलाके में 2022 में भी इमारत से जुड़ा हादसा हो चुका है। राजधानी दिल्ली में पिछले वर्षों में इमारत गिरने की कई बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:

15 नवंबर 2010: ललिता पार्क, लक्ष्मी नगर

लक्ष्मी नगर के ललिता पार्क में पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। हादसे में 67 लोगों की मौत हुई और 70 से अधिक लोग घायल हुए थे। उपलब्ध विवरण में इमारत को अवैध बताया गया था। बेसमेंट में पानी भरने और घटिया निर्माण सामग्री को हादसे की वजहों में बताया गया था।

25 अप्रैल 2022: सत्य निकेतन

सत्य निकेतन में एक पुरानी तीन मंजिला इमारत में अवैध मरम्मत कार्य के दौरान हादसा हुआ था। इसमें दो मजदूरों की मौत हुई थी। नगर निगम का नोटिस जारी होने के बावजूद काम नहीं रोके जाने की बात सामने आई थी।

18 अप्रैल 2025: मुस्तफाबाद

मुस्तफाबाद में करीब 20 साल पुरानी चार मंजिला इमारत देर रात ढह गई थी। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पतली गलियों और ओवर-कंस्ट्रक्शन के कारण राहत और बचाव अभियान 12 घंटे से अधिक समय तक चला था।

जुलाई 2025: वेलकम

वेलकम इलाके में चार मंजिला जर्जर इमारत अचानक गिर गई थी। हादसे में छह लोगों की मौत हुई थी।

30 मई 2026: साकेत/सैदुलाजाब

साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला अवैध इमारत ढह गई थी। इमारत पास की कैंटीन और लाइब्रेरी पर जा गिरी थी। हादसे में छह मेडिकल छात्रों की मौत हुई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

इमारत गिरने की घटनाओं के बाद भवन सुरक्षा, अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों की पहचान जैसे मुद्दे सामने आते हैं। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, दिल्ली में ऐसे मामलों को लेकर सर्वे और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।

विशेषज्ञों ने राजधानी में इमारत गिरने की घटनाओं को अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही से जोड़ते हुए चिंता जताई है। हालांकि, किसी विशेष घटना में जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।

सत्य निकेतन में रविवार को हुई घटना के मामले में फिलहाल सबसे प्रमुख गतिविधि राहत और बचाव अभियान है। पुलिस, एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर मौजूद हैं और मलबे में संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

मौजूदा हादसे में ढही इमारत का इस्तेमाल पीजी के तौर पर किए जाने की जानकारी सामने आई है। करीब 80 गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत में भूतल समेत कुल पांच स्तर बताए गए हैं। प्रत्येक फ्लोर पर पांच कमरे होने के कारण इमारत में लगभग 25 कमरे थे।

पीजी के तौर पर इस्तेमाल होने के कारण इमारत में रहने वाले लोगों की संख्या और हादसे के समय वहां कितने लोग मौजूद थे, यह बचाव अभियान के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी होगी। उपलब्ध सामग्री में इस संबंध में कोई अंतिम संख्या नहीं दी गई है।

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