>उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर सरकार अब पूरी तरह निर्णायक मूड में है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने वाराणसी में स्पष्ट शब्दों में कहा, “बिजली विभाग का निजीकरण होकर रहेगा, और यह प्रक्रिया अब किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी।”
>उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब 29 मई को बिजलीकर्मियों ने हड़ताल और कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। इस पर मंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “जो कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
>ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। वैकल्पिक इंतजाम किए जा चुके हैं ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो।
>एके शर्मा ने कहा, “सरकार बिजली कर्मचारियों की भावनाओं और समस्याओं को समझती है, लेकिन प्रदेश की जनता के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” उनका यह बयान उन तमाम अटकलों पर विराम लगाता है जो बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर समय-समय पर उठती रही हैं।
>सरकार का मानना है कि निजीकरण से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर और समय पर सेवाएं भी मिलेंगी। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, निजीकरण का उद्देश्य किसी के रोजगार को छीनना नहीं, बल्कि सिस्टम को दुरुस्त करना है।
>जहां एक ओर विपक्ष इस कदम को कर्मचारी विरोधी बता रहा है, वहीं राज्य सरकार इसे सुधार की दिशा में ऐतिहासिक फैसला मान रही है।
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