>प्रदेश की पुलिस सेवा में दशकों तक अपनी सख्त छवि और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार अब आध्यात्मिक राह पर अग्रसर दिखाई दे रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद गुरुवार (28 अगस्त) को उन्होंने पत्नी संग वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम पहुंचकर संत प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लिया।
>इस अवसर पर संत प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार को जीवन के नए पड़ाव के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हुए कहा “देश और समाज की सेवा तो आपने पूरी निष्ठा से की, अब भगवान का सुमिरन कीजिए। मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य है कि यह देह जब छूटे तो प्रभु की स्मृति में छूटे।”
>प्रेमानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है, इसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने चेताया कि यदि यह जीवन ईश्वर स्मरण में न बीते तो अगले जन्म में पशु-पक्षी बनने की संभावना रहती है, जो किसी भी दृष्टि से कल्याणकारी नहीं है।
>उन्होंने कहा “हरि स्मृति सर्व विपद विमोक्षण भगवान का नाम लेने से समस्त विपत्तियों का निवारण होता है। इसलिए हर कदम पर ईश्वर का स्मरण आवश्यक है। अब आपको एकांत में जितना अधिक हो सके भगवान का चिंतन करना चाहिए, यही सर्वश्रेष्ठ है।”
>संत ने प्रशांत कुमार को यह भी प्रेरित किया कि अब तक उन्होंने प्रदेश और देश की सेवा ईमानदारी से की है, लेकिन अब समय है कि वह आध्यात्मिक साधना के माध्यम से समाज को नया संदेश दें। उन्होंने कहा “हमारा हृदय सबके लिए है कि सब सुखी रहें, सब आनंदित रहें, सब प्रसन्न रहें।”
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें