JNU चुनाव 2025: विचारधाराओं की जंग कल से शुरू, बैलट पेपर से होगा मतदान

JNU Elections 2025: कौन थामेगा जेएनयू की कमान? कल जब बैलट पेपर खुलेगा, तो सिर्फ नतीजे नहीं विचारधारा का भविष्य होगा तय।
News Desk 03 Nov 2025, 06:20 AM 1 min read
JNU चुनाव 2025: विचारधाराओं की जंग कल से शुरू, बैलट पेपर से होगा मतदान


>दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र राजनीति एक बार फिर जोश और विचारधाराओं की टक्कर के केंद्र में है। कैंपस की दीवारों पर लगे पोस्टर, चाय की दुकानों पर चलती बहसें और छात्रों के नारों से विश्वविद्यालय चुनावी रंग में रंग चुका है। इस बार का छात्रसंघ चुनाव सिर्फ प्रतिनिधियों की लड़ाई नहीं, बल्कि कैंपस की विचारधारा और देश की युवा राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन चुका है।


>जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के तहत मंगलवार, 4 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। पारंपरिक तरीके से बैलट पेपर से वोटिंग की जाएगी और परिणाम 6 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।


>इस बार भी कैंपस में दो प्रमुख धड़े आमने-सामने हैं


    >
  • वामपंथी गठबंधन, जो महिला सुरक्षा, छात्रवृत्ति और हॉस्टल फीस वृद्धि के मुद्दे उठा रहा है।

  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), जो विकास, पारदर्शिता और राष्ट्रवाद के एजेंडे पर चुनाव मैदान में है।


>रविवार को हुई प्रेसिडेंशियल डिबेट में कैंपस का माहौल पूरी तरह राजनीतिक हो गया। यह डिबेट चुनाव प्रचार का सबसे अहम पड़ाव मानी जाती है। आज “नो-कैंपेन डे” रहा, यानी किसी भी प्रकार के प्रचार की अनुमति नहीं थी। वामपंथी गुट ने कहा है कि वह छात्रों को आर्थिक और सामाजिक समानता दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है। उनका जोर छात्रवृत्ति, हॉस्टल फीस और महिला सुरक्षा पर है। वहीं, ABVP कैंपस की सुविधाओं में सुधार और जवाबदेही वाली राजनीति की बात कर रही है। संगठन का दावा है कि उसने हॉस्टल, बस सेवा और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।


>जेएनयू चुनाव 2025 में 20 प्रत्याशी चार मुख्य पदों:- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त महासचिव के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।


    >
  • अध्यक्ष पद के लिए 7 उम्मीदवार,

  • उपाध्यक्ष पद पर 5,

  • महासचिव पद पर 6,

  • और संयुक्त महासचिव के लिए 5 प्रत्याशी मैदान में हैं। इसके अलावा 18 स्कूलों और केंद्रों में काउंसलर पद के लिए 111 उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं।


>जेएनयू के छात्रसंघ चुनाव हमेशा से देश की युवा राजनीति का आईना रहे हैं। यहां से उठे मुद्दे राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। इस बार भी चुनाव में लोकतंत्र, समान अवसर और छात्र अधिकारों पर गहन बहस जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी संगठनों से अपील की है कि वे शालीनता और नियमों का पालन करें ताकि मतदान शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।

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