>लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में एक और बड़ा रजिस्ट्री घोटाला सामने आया है। अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से सात भूखंडों की फर्जी रजिस्ट्री कर दी गई, जिनकी वर्तमान कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है। 2001 में हुई इस गड़बड़ी की जांच के बाद वजीरगंज पुलिस ने गुरुवार को एलडीए के सात अधिकारियों समेत कुल 23 लोगों के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया।
>जांच में पाया गया कि विकल्प खंड, विक्रांत खंड, विनीत खंड, विभवखंड और विनम्रखंड में कुल 14,888 वर्गफीट जमीन के अभिलेखों में छेड़छाड़ की गई थी। रजिस्ट्री संख्या 7398/2001, 7399/2001, 7412/2001, 7414/2001, 7417/2001, 7425/2001 और 7426/2001 में कूटरचना कर वास्तविक मालिकों के नाम बदल दिए गए।
>वजीरगंज इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी ने बताया कि सब रजिस्ट्रार द्वितीय कार्यालय से रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर में एलडीए के प्रभारी संपत्ति अधिकारी अनीता श्रीवास्तव, केके सिंह, एसडी दोहरे, अनूप शुक्ला, संतोष मुर्डिया और अनुभाग अधिकारी एबी तिवारी, आरके मिश्रा समेत कई अधिकारियों का नाम शामिल है।
>एलडीए के बाहर के आरोपी भी इस मामले में शामिल हैं, जिनमें इंदिरानगर निवासी शमशुल हसन, पाटानाला के सरफराज अहमद, छितवापुर वाराणसी की सत्यभामा देवी और अन्य 11 लोग शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच चल रही है और जल्द ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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