मऊ नगर पालिका बनी 'कमीशन पालिका

मऊ में कैमरे के सामने उजागर हुआ ‘कमीशन राज’, योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस पर उठे सवाल
News Desk 16 Jul 2025, 02:17 AM 1 min read
मऊ नगर पालिका बनी 'कमीशन पालिका


>मऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित जीरो टॉलरेंस नीति अब कटघरे में खड़ी होती दिख रही है। मऊ जनपद की नगर पालिका परिषद की हालिया बोर्ड बैठक में वह दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रदेश सरकार के स्वच्छ प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैमरे के सामने नगर पालिका के सभासदों ने एक-दूसरे पर खुलेआम कमीशनखोरी और जातिगत पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए, जिससे मऊ की सियासत में हलचल मच गई है।


>कैमरे पर हुआ ‘कमीशन राज’ का पर्दाफाश


>नगर पालिका परिषद की मंगलवार को हुई बोर्ड बैठक में सभासद अब्दुल सलाम ने नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा, ईओ और चेयरमैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा था कि नगर पालिका में बिना मंत्री की मंजूरी के कोई टेंडर पास नहीं होता। उन्होंने कहा, “70% ठेके मंत्री, उनके भाई और नज़दीकी लोगों को जाते हैं। ठेकेदारों का चयन जाति और निजी संबंधों के आधार पर होता है। बलिया, आजमगढ़ और देवरिया से आने वाले भूमिहार-पंडित ठेकेदारों को तरजीह दी जाती है।”


>उन्होंने चुनौती भरे अंदाज़ में कहा, “अगर मैं गलत हूं तो मंत्री खुद आकर इसे झुठलाएं। सभासद क्या केवल हाथ उठाने के लिए बैठे हैं?” इस बयान ने पूरी बैठक को गरमा दिया और कैमरे पर दर्ज आरोपों ने राजनीति में खलबली मचा दी।


>आरोप बनाम जवाबी आरोपों की जंग


>बैठक में उपस्थित सभासद सत्यप्रकाश और राजीव सैनी ने मंत्री का बचाव करते हुए अध्यक्ष अरशद जमाल पर जवाबी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष खुद 25% कमीशन लेकर पसंदीदा ठेकेदारों को काम दिलाते हैं और अल्पमत में भी जबरन प्रस्ताव पास करवाते हैं। “बैठक छोड़ दी जाती है, ठेकेदार घटिया सामग्री लगाते हैं और सवाल करने पर उल्टा हम पर ही आरोप जड़ दिए जाते हैं,” – यह बयान खुद सत्ता और पारदर्शिता की पोल खोलता है।


>कैमरे की नजर से बच न सका भ्रष्टाचार


>इस पूरे विवाद की खास बात यह रही कि पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। सभासदों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए भ्रष्टाचार, जातिवाद और कमीशनखोरी के आरोप अब सार्वजनिक हो चुके हैं। इससे न सिर्फ नगर पालिका बल्कि राज्य सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर भी बड़ा सवाल खड़ा हुआ है।


>क्या होगी कार्रवाई या फिर दब जाएगा मामला?


>अब निगाहें नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, या यह भी पहले की तरह एक और राजनीतिक ‘मैनेजमेंट’ का शिकार बन जाएगा?


>मऊ की जनता अब जवाब चाहती है – क्या टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता होगी? क्या जातिगत पक्षपात और कमीशनबाजी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे?

← Previous Story Next Story →

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें