>लखनऊ, 27 जून 2025 – उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की नीतियों ने एक बार फिर ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए अब मशरूम की खेती प्रदेश में एक लाभकारी और आत्मनिर्भर व्यवसाय के रूप में उभर रही है। सरकार के विशेष अभियान के तहत राजधानी लखनऊ सहित 08 जिलों में यह हाई-प्रॉफिट एग्री बिजनेस तेजी से फैल रहा है।

महिलाएं बन रही हैं ग्रामीण उद्यमिता की नई पहचान
>मथुरा की गीता देवी और हरदोई की सोनाली सभरवाल ने मशरूम की खेती में नई उम्मीदें जगाई हैं। गीता देवी ने 1.61 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की शुरुआत कर 70 लाख का लोन लिया और आज वे हर साल 25 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। उनकी उत्पादित मशरूम मथुरा, आगरा और दिल्ली तक आपूर्ति हो रही है। सोनाली सभरवाल भी हरदोई जिले की ग्रामीण महिलाओं को इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं और एक सामाजिक बदलाव की बुनियाद रख रही हैं।
इन जिलों में मिल रही आर्थिक उड़ान
>लखनऊ, मथुरा, सहारनपुर, मिर्जापुर, जौनपुर, हरदोई, रायबरेली और भदोही में मशरूम खेती को लेकर किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
सरकार दे रही है तकनीकी और वित्तीय सहयोग
>राज्य सरकार द्वारा आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना और एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के तहत किसानों को वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है।
- केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर लोन पर 6% ब्याज सहायता दे रही हैं।
- किसान agriinfra.dac.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं।
- प्रशिक्षण, वर्कशॉप और फील्ड विज़िट्स के ज़रिए किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी दी जा रही है।
खेती बन रही है आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम
>अब खेती सिर्फ पेट पालने का जरिया नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता और ग्रामीण उद्योग का आधार बन चुकी है। महिलाओं की भागीदारी और तकनीकी खेती ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं।
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