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सत्य निकेतन हादसे के बाद PG में लौटने से डरे छात्र, DU ने कॉलेजों में रुकने की व्यवस्था की

सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद PG में लौटने से डरे छात्रों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय ने साउथ कैंपस के कई कॉलेजों में अस्थायी ठहराव की व्यवस्था की है।
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Bureau News Desk
07 Sep 2026
12:57 PM
1 min read
सत्य निकेतन हादसे के बाद PG में लौटने से डरे छात्र, DU ने कॉलेजों में रुकने की व्यवस्था की
हाइलाइट्स
सत्य निकेतन हादसे के बाद कई छात्र अपने PG में लौटने से डर रहे हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रभावित छात्रों के लिए वैकल्पिक ठहराव की व्यवस्था की है।
साउथ कैंपस के कई कॉलेजों में छात्रों को अस्थायी रूप से ठहराने की तैयारी है।
जरूरत पड़ने पर क्लासरूम में रात गुजारने की सुविधा होगी और गद्दे बिछाए गए हैं।

नई दिल्ली। सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद आसपास के पेइंग गेस्ट (PG) आवासों में रहने वाले कई छात्र-छात्राएं वापस जाने से डर रहे हैं। ऐसे छात्रों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने साउथ कैंपस के कई कॉलेजों में वैकल्पिक ठहराव की व्यवस्था की है। जरूरत पड़ने पर छात्र-छात्राएं कॉलेज के क्लासरूम में रात भी गुजार सकेंगे। इसके लिए क्लासरूम में गद्दे बिछाए गए हैं और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद आसपास के PG में रहने वाले छात्रों के बीच असुरक्षा की स्थिति बनी है। हादसे के बाद कुछ छात्र अपने PG में वापस जाने को लेकर आशंकित हैं। ऐसे में उनके सामने तत्काल ठहरने की समस्या खड़ी हो गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभावित छात्रों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की पहल की है। इसके तहत साउथ कैंपस के कई कॉलेजों को जरूरतमंद छात्रों को ठहराने के लिए तैयार किया गया है। डीयू साउथ कैंपस की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी के मुताबिक, साउथ कैंपस क्षेत्र में करीब 25 कॉलेज हैं। सत्य निकेतन के आसपास छह-सात कॉलेज स्थित हैं। इसलिए इन कॉलेजों को प्रभावित छात्रों की मदद के लिए तैयार किया गया है।

प्रशासन की ओर से जिन संस्थानों में छात्रों के ठहरने की व्यवस्था की गई है, उनमें श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, राम लाल आनंद कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज समेत कई कॉलेज शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर छात्र-छात्राओं को कॉलेज परिसर में अस्थायी रूप से ठहराया जा सकेगा। इसके लिए कुछ क्लासरूम में गद्दे बिछाए गए हैं। कॉलेजों में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी तैयारी की गई है। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए की जा रही है जिन्हें सत्य निकेतन हादसे के बाद तत्काल रहने के लिए वैकल्पिक जगह की जरूरत है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित कॉलेजों से सत्य निकेतन हादसे से प्रभावित छात्रों की संख्या की जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि कितने छात्र-छात्राओं को तत्काल ठहरने की आवश्यकता है। प्राप्त जानकारी के आधार पर छात्रों को संबंधित कॉलेजों में जगह उपलब्ध कराई जाएगी। इससे प्रशासन को जरूरत के अनुसार अस्थायी ठहराव की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। डीयू साउथ कैंपस की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी ने कहा कि फिलहाल छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन उनकी हर संभव मदद कर रहा है।

श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. वी. रवि ने बताया कि कॉलेज अपने छात्रों के अलावा जरूरत पड़ने पर दूसरे संस्थानों की छात्राओं को भी ठहराने के लिए तैयार है। कॉलेज में छात्रों के लिए बिस्तर और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर प्रभावित छात्रों को अस्थायी ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था का इस्तेमाल उन छात्रों के लिए किया जा सकता है जिन्हें अपने मौजूदा PG में वापस जाने में परेशानी या असुरक्षा महसूस हो रही है।

सुरक्षा को देखते हुए श्री वेंकटेश्वर कॉलेज और आर्यभट्ट कॉलेज ने सोमवार को कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है। दोनों संस्थानों की ओर से इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है। कॉलेजों को बंद रखने का फैसला आसपास के PG में रहने वाले छात्रों के बीच हादसे के बाद बनी असुरक्षा की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। इस दौरान प्रभावित छात्रों के लिए वैकल्पिक ठहराव की व्यवस्था से जुड़े कदम भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि हादसे के बाद कुछ छात्रों को तत्काल अपने रहने के स्थान का विकल्प तलाशना पड़ रहा है।

डीयू साउथ कैंपस में करीब 25 कॉलेज हैं। हादसे वाली जगह के आसपास छह-सात कॉलेज होने के कारण इन्हें प्रभावित छात्रों की मदद के लिए तैयार किया गया है। इन कॉलेजों में उपलब्ध स्थान और छात्रों की जरूरत के आधार पर अस्थायी ठहराव की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन ने कॉलेजों से प्रभावित छात्रों की संख्या और तत्काल आवश्यकता की जानकारी मांगी है। इस प्रक्रिया के बाद यह तय किया जाएगा कि किस छात्र या छात्रा को किस कॉलेज में जगह उपलब्ध कराई जानी है।

छात्रों के अस्थायी ठहराव के लिए कॉलेजों के क्लासरूम का इस्तेमाल करने की तैयारी की गई है। जरूरत पड़ने पर छात्र रात क्लासरूम में गुजार सकेंगे। इसके लिए गद्दे बिछाए गए हैं। इसके अलावा भोजन और बिस्तर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित छात्रों को तत्काल वैकल्पिक ठहराव उपलब्ध कराना है।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद इलाके में मौजूद पुराने भवनों को PG में बदलने और उनकी सुरक्षा जांच से जुड़े सवाल सामने आए हैं। हादसे वाली इमारत लंबे समय से खाली थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले वर्ष एक कंपनी ने इस इमारत को लीज पर लिया था। इसके बाद रेनोवेशन कर यहां PG शुरू किया गया था। इस वर्ष इस PG में रहने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ी थी। हादसे के बाद आसपास के PG में रहने वाले छात्रों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता की स्थिति बनी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभावित छात्रों के लिए वैकल्पिक ठहराव की व्यवस्था करते हुए संबंधित कॉलेजों से उनकी संख्या और तत्काल जरूरत की जानकारी मांगी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर छात्रों को कॉलेजों में ठहराने की व्यवस्था की जाएगी। साउथ कैंपस के कई कॉलेजों में इस व्यवस्था के तहत क्लासरूम तैयार किए गए हैं और गद्दे उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरत के अनुसार भोजन तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। श्री वेंकटेश्वर कॉलेज और आर्यभट्ट कॉलेज को सोमवार को बंद रखने का फैसला भी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। डीयू प्रशासन और संबंधित कॉलेज प्रभावित छात्रों के अस्थायी ठहराव की व्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं।

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