>बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस (17 सितंबर) से 2 अक्टूबर तक पूरे देश में सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जाता है। यह केवल जन्मोत्सव नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश है। इस अभियान का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक सेवा की भावना पहुँचाना और देशवासियों में राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा देना है।
>मुझे यह विचार तब आया जब मेरी मुलाकात एक एसी मैकेनिक से हुई। वे हाल ही में नेपाल में फैली हिंसा के समय फँस गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी मोटरसाइकिल पर भारत का नंबर देख कर हिंसक भीड़ ने उन्हें बिना किसी रोक-टोक के जाने दिया। इस अनुभव ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता का एहसास कराया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पीएम मोदी जी की निष्ठा और देशभक्ति ने उन्हें सुरक्षित बचाया।
>यही भावना इस सेवा पखवाड़े में झलकती है। प्रधानमंत्री मोदी जी के जीवन और कार्यों से प्रेरित होकर यह अभियान स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और समाजसेवा के माध्यम से जनता तक सेवा पहुँचाने का माध्यम बनता है।
>इस दौरान देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:
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स्वास्थ्य शिविर और जांच कैंप
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रक्तदान अभियान
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स्वच्छता अभियान और पौधारोपण
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पोषण अभियान
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आयुष्मान कार्ड वितरण
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दिव्यांगजन सहायता
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गरीब और जरूरतमंदों तक सुविधाएँ पहुँचाना
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>प्रधानमंत्री मोदी जी का जीवन दर्शन “जनसेवा ही प्रभुसेवा है” पर आधारित है। यही कारण है कि वे अपने जन्मदिवस को व्यक्तिगत समारोह के बजाय समाजसेवा के रूप में मनाते हैं।
>वा पखवाड़ा 2 अक्टूबर को समाप्त होता है, जो महात्मा गांधी जी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस से भी जुड़ा है।
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महात्मा गांधी जी – सत्य, अहिंसा और सेवा के प्रतीक।
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लाल बहादुर शास्त्री जी – “जय जवान, जय किसान” के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण और परिश्रम की प्रेरणा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी – जनसेवा और राष्ट्रहित के मार्गदर्शक।
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>इस प्रकार यह अभियान तीन महान विभूतियों की सेवा और राष्ट्रसमर्पण की भावना को जोड़ता है और समाज में सेवा की संस्कृति को मजबूत बनाता है।
>"हमें संकल्प लेना चाहिए कि छोटी-छोटी सेवाओं के माध्यम से हम भी राष्ट्रनिर्माण में योगदान दें। सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि है और यही हमारे देश को सशक्त बनाने का मार्ग है। - कमल पाण्डेय, मंडल अध्यक्ष, चिनहट, लखनऊ"
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