सिंचाई विभाग में एआई की एंट्री - नहर संचालन से बाढ़ चेतावनी तक तकनीक से बदलेगी व्यवस्था

उत्तर प्रदेश के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर लखनऊ में कार्यशाला आयोजित। नहर संचालन, बाढ़ चेतावनी और जल प्रबंधन में तकनीक का उपयोग बढ़ेगा।
Bureau 14 Mar 2026, 06:05 PM 1 min read
सिंचाई विभाग में एआई की एंट्री - नहर संचालन से बाढ़ चेतावनी तक तकनीक से बदलेगी व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में सिंचाई और जल संसाधन प्रबंधन को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक नई पहल की गई है। इसी क्रम में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग’ विषय पर लखनऊ के वाल्मी भवन में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

 

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकें शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में एआई के उपयोग से नहर संचालन, जल वितरण की रीयल-टाइम निगरानी, बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली और जल संसाधनों के वैज्ञानिक आकलन को अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

 

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विभागीय कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीकों को अपनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। एआई, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों के उपयोग से जल संसाधनों के संरक्षण, सिंचाई क्षमता में वृद्धि और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सुधार संभव है।

 

प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने कहा कि एआई के उपयोग से विभागीय कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एआई आधारित कार्यों में मैनुअल चेकिंग अनिवार्य रूप से की जाए, जिससे संभावित त्रुटियों से बचा जा सके।

 

कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञों ने एआई आधारित डेटा विश्लेषण, बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली, जल संसाधन प्रबंधन के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम और नहर नेटवर्क के संचालन में डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

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