>उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 6 से 8) में अब पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह रंगीन, रोचक और बच्चों के लिए ज्यादा आकर्षक बनने जा रही है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों की भागीदारी के साथ शिक्षण अधिगम सामग्री (टीएलएम - Teaching Learning Material) तैयार करें, जिससे विषयों को समझना और भी सरल व आनंददायक हो सके।
>इस योजना के तहत प्रत्येक छात्र के लिए 25 रुपये की दर से कुल 647.82 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि सीधे स्कूलों की एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) के खातों में भेजी जा रही है, ताकि शिक्षक स्थानीय स्तर पर टीएलएम का निर्माण व क्रय कर सकें।
>क्या होगी शिक्षण सामग्री में खास बात?
>शिक्षकों को चार्ट पेपर, कार्डशीट, रंगीन कागज, नक्शे, फ्लैश कार्ड जैसी वस्तुएं स्थानीय स्तर से खरीदनी हैं, जिनसे वे अपनी विषय-वस्तु के अनुसार टीएलएम तैयार करेंगे। साथ ही एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी है कि कोई भी सामग्री केंद्रीय स्तर पर नहीं खरीदी जाएगी। इसका उद्देश्य न केवल स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है।
>निरीक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित
>टीएलएम निर्माण और उसके प्रभाव की समीक्षा जिला अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG) टीम द्वारा की जाएगी। सभी शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने बनाए गए टीएलएम को संकुल बैठकों में साझा करें, ताकि अन्य शिक्षक भी उससे प्रेरणा लेकर बेहतर शिक्षण तकनीक विकसित कर सकें।
>इसके अतिरिक्त, सभी विद्यालयों को 10 अगस्त तक प्रबंध पोर्टल पर टीएलएम निर्माण व उपयोग की रिपोर्ट अपलोड करनी होगी, जिससे योजना की निगरानी व मूल्यांकन किया जा सके।
>किन चीजों पर नहीं होगा खर्च?
>शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत राशि को सामान्य स्टेशनरी, सजावटी वस्तुएं, सफाई सामग्री, या बर्तन आदि पर खर्च नहीं किया जा सकता। पूरा खर्च केवल शैक्षिक और उपयोगी सामग्री पर ही होना चाहिए।
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