>उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा इन दिनों बिजलीकर्मियों के जबरदस्त विरोध की चपेट में हैं। मुरादाबाद में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बिजली गुल होने पर पांच इंजीनियरों को तत्काल सस्पेंड करने के फैसले ने चिंगारी को आग बना दिया। गुस्साए बिजली कर्मचारी सोमवार को राजधानी लखनऊ स्थित मंत्री के आवास पर पहुंच गए और जोरदार प्रदर्शन कर डाला।
>‘बिजली विभाग किसी के बाप की जागीर नहीं है’ यही नारा लगाते हुए कर्मचारी घंटों तक मंत्री से मिलने की मांग पर अड़े रहे। लेकिन मंत्री ने किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया। नाराजगी इतनी गहरी थी कि प्रदर्शनकारियों ने "इस्तीफा दो-इस्तीफा दो" के नारे लगाए। तकरीबन ढाई घंटे तक मंत्री घर में कैद रहे, जबकि बाहर कर्मचारी उग्र तेवरों में नारेबाजी करते रहे।
>बिजली कटते ही 5 इंजीनियर सस्पेंड, भड़के कर्मचारी
>मुरादाबाद में रविवार को ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के कार्यक्रम के दौरान जैसे ही उन्होंने इनॉगरेशन के लिए कैंची उठाई, अचानक बिजली गुल हो गई। मंच पर अंधेरा छा गया और कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने यूपी की बिजली व्यवस्था पर तंज कस दिया। इससे मंत्री बेहद नाराज़ हो गए और तुरंत कड़ी कार्रवाई का आदेश दे दिया। परिणामस्वरूप PVVNL की एमडी ईशा दुहन ने मौके पर ही चीफ इंजीनियर एके सिंघल, अधीक्षण अभियंता सुनील अग्रवाल, अधिशासी अभियंता प्रिंस गौतम, SDO राणा प्रताप और JE ललित कुमार को सस्पेंड कर दिया। इस एकतरफा कार्रवाई से पूरे विभाग में असंतोष फैल गया।
>सोमवार को सुबह से ही लखनऊ स्थित ऊर्जा मंत्री के आवास पर बिजली कर्मचारियों का जमावड़ा शुरू हो गया। दोपहर तक हजारों की संख्या में लोग एकत्र हो गए। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। संगठन ने मंत्री से मुलाकात के लिए 10 प्रतिनिधियों के नाम भी भेजे, लेकिन मंत्री ने मिलने से साफ इनकार कर दिया। खासतौर पर रिटायर्ड कर्मियों से मिलने की बात को ठुकरा दिया गया।
>संगठन के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने प्रतिनिधिमंडल की मांग दोहराई लेकिन जवाब वही रहा—"कोई मुलाकात नहीं होगी।"
>करीब ढाई घंटे तक विरोध झेलने के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पुलिस सुरक्षा घेरे में बाहर आए। हाथ जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि "मैं तो इंतज़ार कर रहा था, लेकिन कोई मिलने नहीं आया।" उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ "अवांछित तत्वों" के चलते मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होंने यह भी कहा कि निजीकरण का निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर हुआ है और इसका उद्देश्य जनता के हित में सुधार करना है। बिजलीकर्मियों का गुस्सा सिर्फ सस्पेंशन को लेकर नहीं है। अभियंता संघ के महामंत्री जितेन सिंह गुर्जर के मुताबिक, विभाग में निजीकरण की प्रक्रिया के खिलाफ 8 महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन चल रहा है। लेकिन इसके जवाब में सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी और इंजीनियरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
>संगठन का यह भी आरोप है कि कर्मचारियों के घरों में स्मार्ट मीटर जबरन लगाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली रियायती बिजली की सुविधा खत्म हो रही है। यह इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003, ट्रांसफर स्कीम 2000 और रिफॉर्म एक्ट 1999 का स्पष्ट उल्लंघन है।
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