उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में आजाद अधिकार सेना ने वाराणसी की 386-शिवपुर विधानसभा सीट से संतोष मूरत सिंह को अपना पहला प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी की मंजूरी के बाद राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नूतन ठाकुर ने बुधवार को इस संबंध में पत्र जारी कर घोषणा की।
संतोष मूरत सिंह पिछले दो दशक से अधिक समय से सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित किए जाने के मामले को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज किए जाने के बाद उन्होंने खुद को जीवित साबित करने और अपनी पहचान से जुड़े अधिकारों को बहाल कराने के लिए तहसील से लेकर शासन-प्रशासन तक संघर्ष किया है।
आजाद अधिकार सेना ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए संतोष मूरत सिंह को वाराणसी की 386-शिवपुर विधानसभा सीट से अपना पहला प्रत्याशी बनाया है। पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी के अनुमोदन के बाद राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नूतन ठाकुर ने बुधवार को प्रत्याशी घोषित किए जाने संबंधी पत्र जारी किया। इसके साथ ही संतोष मूरत सिंह का नाम पार्टी के घोषित विधानसभा प्रत्याशियों में सामने आया है।
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संतोष मूरत सिंह चोलापुर के निवासी हैं और मूल रूप से चौबेपुर थाना क्षेत्र के छितौनी गांव के रहने वाले बताए गए हैं। पिछले दो दशक से अधिक समय से उनका संघर्ष सरकारी अभिलेखों में खुद को जीवित साबित करने से जुड़ा रहा है। संतोष मूरत सिंह के अनुसार, सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी पहचान और जीवित होने के अधिकार को प्रमाणित करने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में आवेदन और संपर्क किए। उन्होंने इस मामले को लेकर तहसील से लेकर शासन-प्रशासन तक अधिकारियों के सामने अपनी स्थिति रखने का प्रयास किया।
संतोष मूरत सिंह का आरोप है कि उनके पट्टीदारों ने कथित तौर पर साजिश के तहत उन्हें सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित करा दिया और उनकी संपत्तियां अपने नाम करा लीं। उनका यह भी कहना है कि इसी दौरान यह अफवाह फैलाई गई कि ट्रेन में हुए धमाके में उनकी मौत हो गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के संबंध में किसी न्यायिक निष्कर्ष या प्रशासनिक जांच के अंतिम परिणाम का उल्लेख नहीं है। इसी वजह से इस मामले से जुड़े आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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सरकारी रिकॉर्ड में खुद को मृत दर्ज किए जाने के विरोध में संतोष मूरत सिंह ने लंबे समय तक अलग तरीके से अपनी बात उठाई। वह गले में ‘मैं जिंदा हूं’ लिखी तख्ती लटकाकर विभिन्न सरकारी कार्यालयों में जाते रहे। उनका यह प्रयास सरकारी अभिलेखों में दर्ज स्थिति को बदलवाने और स्वयं को जीवित साबित करने की मांग से जुड़ा रहा। यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा में रहा और प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा।
संतोष मूरत सिंह के मामले का संज्ञान तत्कालीन वाराणसी जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने भी लिया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी उनके घर पहुंचे और मामले की जानकारी ली थी। हालांकि, उनके तबादले के बाद संतोष मूरत सिंह के अनुसार मामला फिर पहले की स्थिति में चला गया। उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेज और पूरा प्रकरण तहसील की फाइलों तक सीमित रह गया।
संतोष मूरत सिंह का संघर्ष केवल अपनी पहचान को सरकारी रिकॉर्ड में सही कराने तक सीमित नहीं रहा। उनके अनुसार, उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी विवाद रहा है। उनका आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज किए जाने के बाद उनकी संपत्तियों को दूसरे लोगों के नाम करा दिया गया। इस मामले में संबंधित दस्तावेज और प्रशासनिक रिकॉर्ड तहसील स्तर पर मौजूद बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन संपत्ति संबंधी दावों के संबंध में किसी अदालत के अंतिम फैसले का उल्लेख नहीं है।
आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने संतोष मूरत सिंह को पार्टी का प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर कहा कि वह अन्याय, अत्याचार और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष तथा आम नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव मैदान में उतरेंगे। पार्टी ने संतोष मूरत सिंह को शिवपुर विधानसभा सीट से अपना पहला प्रत्याशी घोषित किया है।
आजाद अधिकार सेना की केंद्रीय कार्यकारिणी के अनुमोदन के बाद पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नूतन ठाकुर ने बुधवार को प्रत्याशी घोषित किए जाने का पत्र जारी किया। इस घोषणा के साथ वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की ओर से घोषित शुरुआती सीटों में शामिल हो गई है।
संतोष मूरत सिंह पिछले दो दशक से अधिक समय से सरकारी अभिलेखों में अपनी स्थिति को लेकर संघर्ष करते रहे हैं। उनका दावा है कि उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज किया गया, जबकि वह जीवित हैं। इस स्थिति को बदलवाने के लिए उन्होंने विभिन्न सरकारी कार्यालयों का रुख किया। ‘मैं जिंदा हूं’ लिखी तख्ती के साथ सरकारी दफ्तरों में जाने की वजह से उनका मामला चर्चा में आया। अब आजाद अधिकार सेना ने उन्हें वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। इस तरह उनका लंबे समय से चला आ रहा प्रशासनिक और दस्तावेजी संघर्ष अब उनके राजनीतिक जीवन से भी जुड़ गया है।
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