>उत्तर प्रदेश का विंध्याचल मीरजापुर क्षेत्र तेजी से उभर रहा है राज्य का अगला बड़ा पर्यटन केंद्र बनने के तौर पर। काशी और अयोध्या की तरह ही मां विंध्यवासिनी मंदिर की आस्था और लोकप्रियता ने नए आयाम छुए हैं। वर्ष 2025 में उम्मीद की जा रही है कि विंध्याचल में दर्शनार्थियों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच जाएगी। इसके पहले छह महीनों में ही 64 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद लिया है।
>पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि विंध्याचल को सम्पूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। विंध्यवासिनी देवी मंदिर के साथ-साथ अष्टभुजा देवी और कालीखोह मंदिर त्रिकोण यात्रा ने श्रद्धालुओं को और भी आकर्षित किया है। इस वर्ष अब तक अष्टभुजा मंदिर में 38 लाख से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं, जबकि कालीखोह गुफा में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं।
>मंत्री जयवीर सिंह ने आगे कहा, "सरकार विंध्याचल को पर्यटन प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विंध्याचल में धार्मिक यात्रा के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर का भी अनुभव मिलेगा। विंध्याचल कॉरिडोर, मल्टी-लेवल पार्किंग, शौचालय, घाट और बेहतर परिवहन सुविधाओं पर कार्य चल रहा है।"
>प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा, "अब मिर्जापुर में केवल मानसून में झरनों के दर्शन नहीं, बल्कि पूरे वर्ष पर्यटक आ रहे हैं। विंध्याचल में धार्मिक, पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और होम-स्टे जैसी विविध परियोजनाएं पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।"
>विंध्याचल विकास परियोजनाओं में ट्रैकिंग पथ, नेचर वॉक, सलखन फॉसिल पार्क को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास भी शामिल है। यह क्षेत्र न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र बनता जा रहा है, बल्कि इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
>उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष घरेलू पर्यटन में देश का नंबर एक बनने का श्रेय इसी प्रयासों को जाता है। वर्ष 2024 में प्रदेश में कुल 64.9 करोड़ पर्यटकों ने प्रदेश का रुख किया था।
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