>लखनऊ, 27 जून – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार अब सामूहिक विवाह योजना को नए स्तर पर ले जा रही है। 2025 में एक लाख से अधिक गरीब जोड़ों के विवाह कराकर योगी सरकार न केवल सामाजिक न्याय को सशक्त बनाएगी, बल्कि पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी से इसे पूरी तरह भ्रष्टाचारमुक्त भी बनाएगी।
>मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अब केवल एक सरकारी सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक सामाजिक हस्तक्षेप बन चुका है, जो न केवल जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक राहत देता है, बल्कि महिलाओं को गरिमा और समानता का एहसास भी कराता है।
क्या हैं 2025 के बदलाव?
- अब हर जोड़े पर ₹1 लाख की वित्तीय सहायता
- डिजिटल निगरानी और आधार सत्यापन से फर्जीवाड़े पर रोक
- फर्मों का चयन जिला नहीं, निदेशालय स्तर से होगा
- वर-वधू की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य
- उपहारों की गुणवत्ता की निगरानी अब तकनीकी माध्यम से
>दूसरे जिले के अधिकारी बनेंगे आब्जर्वर, ताकि पारदर्शिता बनी रहे
अब हर विवाह समारोह रहेगा सख्त निगरानी में
>हर विवाह समारोह में मंडलीय उपनिदेशक और संबंधित जिले के समाज कल्याण अधिकारी की मौजूदगी जरूरी होगी। इसके साथ ही एक जिले का अधिकारी दूसरे जिले में आब्जर्वर के रूप में तैनात किया जाएगा, जिससे कार्यक्रम की निष्पक्षता बनी रहे।
लाभार्थियों की सूची बनेगी अभियान के तहत
>योजना को सही पात्रों तक पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी, ग्राम पंचायत और स्थानीय निकायों के सहयोग से लाभार्थियों की पहचान की जाएगी। शासन ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पात्र परिवारों की सूची समयबद्ध रूप से तैयार कर आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ें।
>समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के अनुसार, “हम चाहते हैं कि योजना पूरी तरह तकनीकी रूप से पारदर्शी बने और किसी को भी गलत लाभ न मिले।”
>योजना प्रभारी उपनिदेशक आर.पी. सिंह ने कहा, “यह महज विवाह योजना नहीं, बल्कि एक सामुदायिक पहल है, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग की बेटियों को गरिमा और सुरक्षा मिलती है।”
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