>गोरखपुर, 27 जून — महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय (एमजीयूजी) ने अपने मात्र चार वर्षों के छोटे से शैक्षणिक जीवनकाल में जो मुकाम हासिल किया है, वह किसी भी नवस्थापित विश्वविद्यालय के लिए मिसाल है। 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गोरखपुर पहुंचकर इस प्रगति यात्रा को नई ऊंचाई देंगी। वे यहां नवनिर्मित अकादमिक भवन, अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, पंचकर्म केंद्र का लोकार्पण और गर्ल्स हॉस्टल का शिलान्यास करेंगी।
>एमजीयूजी की स्थापना 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा की गई थी। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोरक्षपीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिनकी दृष्टि इसे गोरखपुर को “नॉलेज सिटी” बनाने के उद्देश्य से विकसित करना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक विस्तार
>एमजीयूजी आज आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद, नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मेसी, एग्रीकल्चर और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में डिप्लोमा से मास्टर डिग्री तक के 24 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है।
>यहां बीएएमएस की पढ़ाई पहले सत्र से ही शुरू हो गई थी जबकि एमबीबीएस कोर्स की शुरुआत पिछले सत्र में हुई। नर्सिंग और पैरामेडिकल में रोजगारोन्मुखी दर्जनभर कोर्सेज छात्रों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित कर रहे हैं।
रिसर्च, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में प्रगति
>एमजीयूजी ने शिक्षा, चिकित्सा, कृषि अनुसंधान व ग्राम्य विकास को बढ़ावा देने के लिए एम्स गोरखपुर, केजीएमयू लखनऊ, अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय (नेपाल), इंडो-यूरोपियन चैंबर ऑफ स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज समेत कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से एमओयू किए हैं। ये समझौते विश्वविद्यालय के छात्रों को स्टार्टअप, इनोवेशन और वर्ल्ड क्लास रिसर्च की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
विचार परंपरा से प्रेरित शिक्षा
>कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, विश्वविद्यालय की आधारशिला उन विचारों पर रखी गई है जिनका विश्वास था कि स्वराज्य और स्वावलंबन का आधार शिक्षा है। यही विचार महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ जी महाराज की परंपरा से होकर वर्तमान में योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन में प्रकट हो रहा है।
>कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह कहते हैं कि एमजीयूजी के सभी पाठ्यक्रम समाज, राष्ट्र और रोजगार की त्रि-दिशा में केंद्रित हैं। यह विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति के अनुरूप एक रोल मॉडल बन रहा है।
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