मंगलवार को हुई तेज बारिश ने ग्रेटर नोएडा में बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए। सेक्टर-27 स्थित द हेमिस्फीयर सोसायटी की चाहरदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि गामा-1 और बीटा-1 सेक्टर के बीच 60 मीटर रोड पर बना एक पुराना नाला भी टूटकर धंस गया। दोनों घटनाओं में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते मरम्मत नहीं होने से बड़ा हादसा हो सकता था।
द हेमिस्फीयर सोसायटी के निवासियों के अनुसार, बारिश के दौरान दीवार के आसपास पानी भरने से दबाव बढ़ गया, जिससे जगह-जगह दरारें आ गईं। फिलहाल दीवार को गिरने से रोकने के लिए बल्लियों का सहारा दिया गया है। लोगों का आरोप है कि जर्जर चाहरदीवारी को लेकर कई वर्षों से प्राधिकरण से शिकायत की जा रही थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया।
उधर, गामा-1 और बीटा-1 सेक्टर के बीच स्थित नाले का एक हिस्सा भी भारी बारिश के दौरान अचानक धंस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज जलभराव के कारण नाले की कमजोर दीवारें दबाव नहीं झेल सकीं और बीच से टूट गईं। घटना के समय मार्ग पर अधिक आवाजाही नहीं होने से कोई जनहानि नहीं हुई।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर के कई सेक्टरों में नालों, स्लैब और फुटपाथों की स्थिति खराब है। उनका आरोप है कि मानसून से पहले मरम्मत और सफाई के दावे जमीन पर पूरी तरह नजर नहीं आते। लोगों ने प्राधिकरण से शहरभर के जर्जर नालों और संरचनाओं का सर्वे कराकर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है।
इस मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-5 के वरिष्ठ प्रबंधक राजेश कुमार निम ने बताया कि संबंधित नाला काफी पुराना था और अधिक वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि नाले का पुनर्निर्माण जल्द कराया जाएगा।
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