>उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने राज्य की चीनी मिलों से प्रदूषण नियंत्रण के लिए नवीनतम तकनीक अपनाने का आग्रह किया है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. आर.पी. सिंह ने गुरुवार को चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहा कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना ही सतत विकास की कुंजी है।
>उन्होंने स्पष्ट किया कि चीनी मिलें प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं और लाखों किसानों तथा श्रमिकों के लिए रोजगार का आधार हैं। ऐसे में इन मिलों की जिम्मेदारी है कि वे उत्पादन प्रक्रिया के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दें।
>डॉ. सिंह ने चीनी मिलों को उन्नत अपशिष्ट उपचार संयंत्र (Effluent Treatment Plant - ETP), अत्याधुनिक उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली, और कम ईंधन खपत तकनीक अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा वर्ष 2018 में लागू किए गए चार्टर-1.0 की सफलता का उल्लेख करते हुए, चार्टर-2.0 को भी प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता बताई।
>बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना राज्य और उद्योगों दोनों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदूषण नियंत्रण एवं सहमति प्रक्रियाओं में बोर्ड उद्योगों को पूरा सहयोग प्रदान करेगा।
>बैठक में उप्र चीनी मिल एसोसिएशन के वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार डॉ. यशपाल सिंह ने चार्टर-2.0 की दिशा में किए गए प्रयासों और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही चीनी मिलों से आग्रह किया गया कि वे अपने सुझाव और शिकायतें लिखित रूप में सीपीसीबी को भेजें, ताकि सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
>प्रदेश की 133 चीनी मिलें न केवल राज्य को देश का अग्रणी चीनी उत्पादक बनाती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की खुशहाली में भी अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ये इकाइयां सतत विकास का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर सकती हैं।
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