>उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अग्रणी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने शहरी हरित नीति 2024 को मंज़ूरी दे दी है। यह नीति प्रदेश के शहरी क्षेत्रों को सतत विकास, जलवायु संतुलन और पारिस्थितिक संरक्षण की दिशा में अग्रसर करेगी। नीति का उद्देश्य सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि शहरी जीवनशैली को पूरी तरह से ग्रीन बनाना है।
क्या है शहरी हरित नीति का लक्ष्य?
इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन स्टेट की दिशा में आगे ले जाना है। इसके अंतर्गत:
- शहरों को ग्रीन स्टार रेटिंग दी जाएगी।
- ग्रीन सिटी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा।
- वर्टिकल गार्डन, रूफटॉप गार्डन, स्पॉन्ज पार्क, और मियावाकी फॉरेस्ट का विकास किया जाएगा।
- बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शहर को “अल्टीमेट ग्रीन सिटी अवॉर्ड” मिलेगा।
तीन स्तरों पर हरित परिवर्तन की रणनीति
शहरी हरित नीति को तीन स्तरों पर लागू किया जाएगा:
- शहर स्तर पर – ग्रीन बेल्ट, स्पॉन्ज पार्क, और हरित मेला जैसे आयोजन होंगे।
- मोहल्ला स्तर पर – पॉकेट पार्क, सामुदायिक बाग़, और ‘पार्क गोद लो’ अभियान चलाया जाएगा।
- भवन स्तर पर – हर नए भवन के लिए ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
तीन चरणों में होगी नीति की क्रियान्वयन प्रक्रिया
- 2025-2027 – स्मार्ट सिटी और बड़े महानगरों में शुरुआत।
- 2027-2030 – एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर शामिल।
- 2030 के बाद – राज्य की सभी नगर पालिकाओं और पंचायतों में लागू होगी नीति।
हरियाली से मिलेगा इनाम: ग्रीन स्टार रैंकिंग और पुरस्कार
प्रदेश के हर शहर को उसके हरित प्रदर्शन के आधार पर रैंक किया जाएगा:
- ग्रीन सिटी
- ग्रीन +
- ग्रीन ++
- ग्रीन +++
“अल्टीमेट ग्रीन सिटी” पुरस्कार उन शहरों को दिया जाएगा, जो अधिकतम रैंकिंग और प्रभावी हरित पहल दिखाएंगे।
वित्तीय सहायता और जनभागीदारी भी होगी नीति की रीढ़
हरित नीति के तहत:
- AMRUT 2.0, स्वच्छ वायु योजना, वित्त आयोगों और CSR फंडिंग से मिलेगा वित्तीय समर्थन।
- स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों और समाजिक संगठनों की भागीदारी से वृक्षारोपण और ग्रीन गार्डन का प्रसार किया जाएगा।
- ग्रीन फेयर, फूल उत्सव, वर्कशॉप्स जैसी गतिविधियां हरियाली को जनांदोलन में बदलेंगी।
शहरी हरित नीति क्यों है अहम?
इस नीति से:
- शहरी क्षेत्रों में ग्रीन कवर बढ़ेगा।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सकेगा।
- जनस्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार, और सम्पत्ति मूल्य में सकारात्मक सुधार होंगे।
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