>लखनऊ | 24 जून: देश की आर्थिक प्रगति की तस्वीर बदल रही है, और इस बदलाव की अगुवाई कर रहा है उत्तर प्रदेश। बैंक ऑफ बड़ौदा की हालिया रिपोर्ट बताती है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पूंजीगत निवेशक राज्य बनने जा रहा है। अनुमान के अनुसार, यूपी अकेले 16.3% हिस्सेदारी के साथ टॉप पर रहेगा, जो कि गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों से भी अधिक है।
>यह लगातार दूसरा साल है जब उत्तर प्रदेश ने पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में देश का नेतृत्व किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में भी यूपी ने 16.9% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘नया यूपी’ अब न सिर्फ निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है, बल्कि यह भारत के आर्थिक रोडमैप में मुख्य भूमिका निभा रहा है।
>बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26 राज्यों का कुल पूंजीगत व्यय ₹10.2 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इनमें उत्तर प्रदेश (16.3%), गुजरात (9.4%), महाराष्ट्र (8.3%), मध्य प्रदेश (8.1%) और कर्नाटक (7.6%) – ये टॉप-5 राज्य मिलकर देश के 50% से अधिक पूंजीगत व्यय का वहन करेंगे। यूपी की यह अग्रणी भूमिका राज्य में तेज़ी से हो रहे बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास का प्रमाण है।
>उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते कुछ वर्षों में एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट विस्तार, लॉजिस्टिक हब, औद्योगिक गलियारों, मेडिकल कॉलेज, फिल्म सिटी और डिफेंस कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में ऐतिहासिक निवेश किया है। इससे न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांति आई है, बल्कि रोज़गार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं।
>ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 के तहत मिले अरबों रुपये के निवेश प्रस्ताव अब धरातल पर उतर रहे हैं। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, कानून-व्यवस्था में सुधार और नीतिगत स्थिरता ने यूपी को घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बना दिया है।
>रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में 26 राज्यों की कुल प्राप्तियां ₹69.4 लाख करोड़ तक पहुँचेंगी। इसमें उत्तर प्रदेश अकेले 13.3% राजस्व का योगदान देगा, जो किसी भी राज्य से अधिक है। इसके बाद महाराष्ट्र (11.3%), मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान (5.9% प्रत्येक) रहेंगे।
>इस उपलब्धि से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि राजस्व सृजन में भी अग्रणी राज्य बन चुका है। इसका सीधा फायदा राज्य की सामाजिक योजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और नगरीय विकास पर हो रहे खर्चों में दिख रहा है।
>उत्तर प्रदेश अब केवल एक जनसंख्या-समृद्ध राज्य नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक मॉडल का सबसे मजबूत स्तंभ बन रहा है। पूंजीगत व्यय में लगातार दो वर्षों तक देश में शीर्ष स्थान, राजस्व संग्रह में अग्रणी भूमिका और निवेशकों की पसंदीदा मंज़िल बनकर योगी सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति, पारदर्शी प्रशासन और ठोस योजना हो, तो कोई भी राज्य विकास की बुलंदियों को छू सकता है।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें