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UP News: योगी सरकार का बड़ा फरमान, हिंसा में शामिल अभ्यर्थी को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी

UP News: नई नीति के तहत हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने के मकसद वाले संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए अपात्र होंगे। उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों पर यह व्यवस्था लागू होगी।
Bureau
Bureau News Desk
29 Oct 2026
03:05 PM
1 min read
UP News: योगी सरकार का बड़ा फरमान, हिंसा में शामिल अभ्यर्थी को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी
सोर्स-फाइल फोटो
हाइलाइट्स
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन के नियम सख्त
केवल एफआईआर दर्ज होने से नहीं होंगे अपात्र
पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
सत्यापन लंबित होने पर भी मिल सकता है नियुक्ति पत्र

UP News: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन को लेकर नई नीति लागू कर दी गयी है। नई नीति के तहत हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने के मकसद वाले संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए अपात्र होंगे। उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों पर यह व्यवस्था लागू होगी।

शासनादेश के मुताबिक किसी भी अभ्यर्थी का ऐसे संगठन का सदस्य होना, जिसका उद्देश्य हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलना है। वह सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्य होंगे। हालांकि राजनीतिक विचारधारा के कारण किसी अभ्यर्थी को अपात्र नहीं ठहराया जाएगा। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में यह शासनादेश जारी किया है।

लागू की गयी नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से उसे अयोग्य नहीं माना जाएगा। अंतिम रूप से बरी, समझौते से निपटे मामलों और किशोर न्याय कानून के तहत आने वाले मामलों में भी स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होगी। लेकिन हत्या, डकैती, भ्रष्टाचार, दुष्कर्म, महिला गरिमा भंग करने, आतंकवादी गतिविधियों, सॉल्वर गैंग और पेपर लीक से जुड़े प्रकरणों में संलिप्तता पाये जाने पर अभ्यर्थी की पात्रता प्रभावित हो सकती है। इस तरह के मामलों में संबंधित तथ्यों के आधार पर फैसला किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत चरित्र सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने पर नियुक्ति पत्र रोकना जरूरीनहीं होगा। अभ्यर्थी से स्व-घोषणा पत्र और निर्धारित प्रपत्र लेकर औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी हो सकेगा। यदि कोई अभ्यर्थी भ्रामक जानकारी या सत्यापन में अपात्र पाया जाता है, तो उसकी नियुक्ति रद्द करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को सत्यापन के लिए रिपोर्ट मिलने के 30 दिनों के अंदर नियुक्ति प्राधिकारी को रिपोर्ट देनी होगी।

रिपोर्ट में देरी होने पर गृह विभाग निगरानी करेगा। सत्यापन के दौरान पुलिस अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी और न ही भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी संस्तुति भेजने से पहले अभ्यर्थी को ऑनलाइन या फिर व्यक्तिगत रूप से पक्ष रखने का अवसर देंगे। पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन अनिवार्य नहीं होगा।  

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