>उत्तर प्रदेश एक बार फिर वैश्विक निवेश के पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2026 के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने ‘न्यू आउटरीच प्लान’ के तहत देश और दुनिया के निवेशकों को आमंत्रित करने की बड़ी रणनीति तैयार की है। इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर रोडशो आयोजित कर निवेश के नए द्वार खोले जाएंगे।
>सरकार की मंशा स्पष्ट है यूपी को देश का नंबर-1 निवेश गंतव्य बनाना। इसके लिए इन्वेस्ट यूपी न केवल नई नीतियों पर काम कर रहा है बल्कि हर 15 दिन में राउंड टेबल बैठकों के माध्यम से निवेशकों से सीधा संवाद भी कर रहा है।
>'चीन+1 रणनीति' के तहत अब सितंबर-अक्टूबर 2025 में सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, यूएई, कतर और कनाडा जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय रोडशो आयोजित किए जाएंगे। साथ ही देश के बड़े शहरों में भी राष्ट्रीय स्तर पर रोडशो दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच चलेंगे। इनका उद्देश्य फरवरी 2026 में प्रस्तावित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के लिए नए और प्रभावशाली निवेश प्रस्तावों को आकर्षित करना है।
>योगी सरकार नवंबर 2025 में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 5.0 (GBC-5) का आयोजन कर रही है, जिसमें 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य है। यह आंकड़ा समय के साथ बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।
>अब तक प्रदेश में 16,478 परियोजनाओं में से 8,363 परियोजनाएं व्यावसायिक संचालन में आ चुकी हैं, जिनका कुल निवेश 4.33 लाख करोड़ रुपये है, जबकि 8,115 परियोजनाएं शीघ्र पूरी होनी हैं जिनका मूल्य 7.76 लाख करोड़ रुपये है।
>'इन्वेस्ट यूपी' ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) नीति को अधिसूचित कर दिया है। फुटवियर और चर्म उत्पाद नीति, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल नीति, और निजी निवेश प्रोत्साहन नीति जैसे ड्राफ्ट तैयार हो चुके हैं। इन नीतियों में MSME से बड़े उद्योगों में रूपांतरण, विस्तार योजनाएं, त्वरित निवेश स्वीकृति जैसे नवाचार शामिल किए जा रहे हैं।
>सरकार अब हर 15 दिन में एक घंटे की राउंड टेबल बैठक के माध्यम से निवेशकों से सीधा संवाद कर रही है। इसके साथ ही साप्ताहिक बैठकों द्वारा रणनीति में त्वरित बदलाव भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के सहयोग से नई निवेश लीड्स प्राप्त करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
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