Ambedkar Nagar News: अर्णब तूफान के असर से हुई बेमौसम बारिश ने जिले के किसानों की कमर तोड़ दी है। सालभर खेतों में खून-पसीना बहाकर धान की फसल तैयार करने वाले किसानों की उम्मीदों पर मौसम की मार ने पानी फेर दिया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण कहीं खेतों में खड़ी धान की तैयार फसल जमीन पर बिछ गई, तो कहीं कटाई के बाद खेतों में रखी धान की फसल बारिश में भीगकर बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
किसानों के लिए यह नुकसान सिर्फ फसल का नहीं, बल्कि सालभर की मेहनत और भविष्य की योजनाओं पर पड़े संकट जैसा है। किसी किसान ने अपनी बेटी की शादी के लिए धान की फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद लगा रखी थी, तो कोई खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकाने की तैयारी में था। किसी को बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें पूरी करनी थीं, लेकिन बेमौसम बारिश ने इन सभी उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
खेतों में लहलहाती धान की फसल अब जमीन पर बिछी दिखाई दे रही है। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने और कटी हुई फसल भीगने से किसानों को उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होने की आशंका सता रही है। किसानों के सामने अब भीगी हुई फसल को बचाने, सुखाने और सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, जिन किसानों की फसल अभी खेतों में खड़ी है, उन्हें आगे भी मौसम खराब रहने की चिंता सता रही है।
किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर काफी पैसा खर्च होता है। पूरे साल की मेहनत के बाद जब फसल घर पहुंचने का समय आता है, तब इस तरह की प्राकृतिक आपदा किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर देती है। पहले से ही खेती की बढ़ती लागत और कम मुनाफे से जूझ रहे किसानों के लिए यह बारिश किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
अब किसानों की निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हैं। जरूरत है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का स्थलीय निरीक्षण और निष्पक्ष सर्वे कराया जाए, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन हो सके। साथ ही पात्र किसानों को नियमानुसार शीघ्र मुआवजा और राहत उपलब्ध कराई जाए। सवाल यही है कि अन्नदाता की सालभर की मेहनत जब कुदरत की मार से बर्बाद हो रही है, तो क्या किसानों को समय रहते राहत मिल पाएगी या फिर उन्हें अपनी बर्बादी का दर्द खुद ही सहना पड़ेगा?
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