Tuesday, 29 September 2026 | Lucknow | 29°C

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में मार्च

SIR को लेकर कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की; दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
Bureau
Bureau News Desk
28 Sep 2026
04:46 PM
1 min read
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में मार्च
हाइलाइट्स
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई राज्यों में प्रदर्शन किया।
दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने मार्च निकाला और जंतर-मंतर रोड की ओर बढ़ने की कोशिश की।
जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए बैरिकेडिंग और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किए।

नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद सोमवार को सड़क पर दिखाई दिया। कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दों को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मार्च और विरोध प्रदर्शन किए।

प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका और अधिकार क्षेत्र से जुड़े कई सवाल उठे हैं। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पार्टी पर भ्रम और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ते को नियंत्रित किया, इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर रोड की ओर बढ़े। दिल्ली में यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब एसआईआर और मतदाता सूचियों में नामों के पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। इससे पहले भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। कांग्रेस ने अपने देशव्यापी कार्यक्रम के तहत 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी की ओर से राज्य और जिला इकाइयों को प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे।

ये खबर भी पढ़े - लखनऊ की मामा कॉलोनी में 15 दिनों से जलभराव, घरों से निकलना मुश्किल

उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। उन्नाव में पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि मुरादाबाद में प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया। उत्तर प्रदेश में एसआईआर से जुड़ा मुद्दा पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित युवा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम भी सितंबर में स्थगित किया गया था। चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता शहीद स्मारक से चुनाव आयोग के प्रदेश कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए रास्ते में बैरिकेडिंग की। मौके पर वॉटर कैनन भी तैनात की गईं। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछार की गई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति भी बनी। देश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस की ओर से एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए हैं।

महाराष्ट्र में कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कई जिलों में प्रदर्शन किया। पुणे में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। कोल्हापुर में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किया गया। महाराष्ट्र कांग्रेस ने 28 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया था। पार्टी ने चुनावी मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों को प्रदर्शन का प्रमुख आधार बनाया है। पुणे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसी मुद्दे पर विरोध जताया।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता से जुड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्वाचन आयोग का काम नागरिकता निर्धारित करना नहीं है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने बयान में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया के एक हालिया साक्षात्कार का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और संसद द्वारा समय-समय पर किए गए उसके संशोधनों के तहत होता है।

कांग्रेस का तर्क है कि एसआईआर के दौरान नागरिकता से संबंधित प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठते हैं। पार्टी इसी मुद्दे को अपने विरोध प्रदर्शन में प्रमुखता से उठा रही है। हालांकि, एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की स्थिति इससे अलग रही है। बिहार में एसआईआर से संबंधित मामले में उच्चतम न्यायालय ने 2026 में इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था। मामले में यह सवाल भी उठा था कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में नागरिकता की जांच की सीमा क्या हो सकती है। न्यायालय ने चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों और मतदाता पात्रता से जुड़े उसके पक्ष को स्वीकार किया।

भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जो लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन से संबंधित जिम्मेदारियां निभाता है। आयोग मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। आयोग की मौजूदा वेबसाइट पर एसआईआर-2026 से संबंधित मतदाता सूची सेवाएं उपलब्ध हैं। मतदाता अपने नाम की जांच करने और मतदाता सूची से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल ऑनलाइन कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, विवरण में सुधार, नाम हटाने और अन्य प्रक्रियाओं के लिए निर्धारित प्रपत्र और ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं।

ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह निर्वाचन आयुक्त के रूप में भी काम कर चुके हैं। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। उनके कार्यकाल में 18वीं लोकसभा के चुनाव के साथ जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली सहित विभिन्न चुनाव हुए हैं।

कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। कांग्रेस ने इससे पहले भी अपनी राज्य इकाइयों को चुनाव आयोग के राज्य कार्यालयों तक मार्च निकालने और जिला स्तर पर प्रदर्शन करने के निर्देश दिए थे। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके कार्यकाल से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी उठाई है। कांग्रेस के विरोध का केंद्र एसआईआर, मतदाता सूची में नामों के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल हैं।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस के प्रदर्शन और आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर कहा कि कांग्रेस और इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस देश की प्रगति से निराश हैं और उनके आरोप तथ्यों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं। नड्डा ने कहा कि चुनाव आयोग ने कांग्रेस के आरोपों पर तथ्य स्पष्ट किए हैं और इसके बावजूद माहौल बिगाड़ने की कोशिश जारी है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि किसी बात को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाती। नड्डा ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों की ओर से भ्रम और अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। उनके बयान का संदर्भ कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों और चल रहे विरोध प्रदर्शनों से था।

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग ने अपने विभिन्न स्पष्टीकरणों में प्रक्रिया को नियमों और संवैधानिक अधिकारों के तहत बताया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए हैं। आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने से जुड़े फॉर्म-6 में किए गए बदलावों का भी बचाव किया है। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि मतदाता सूची में संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित कानूनी ढांचे के तहत की जा रही है। आयोग की आधिकारिक मतदाता सेवा वेबसाइट पर एसआईआर-2026 के तहत नाम खोजने, गणना प्रपत्र भरने और मतदाता सूची से संबंधित अन्य सेवाएं उपलब्ध हैं।

पूरे विवाद का एक प्रमुख हिस्सा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा है। कांग्रेस इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम, दस्तावेजों और नागरिकता से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठा रही है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग एसआईआर को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के रूप में संचालित कर रहा है और इसके लिए ऑनलाइन सेवाएं तथा नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध करा रहा है। इस बीच कांग्रेस ने प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया है। भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज किया जा रहा है।

28 सितंबर को हुए प्रदर्शनों से पहले कांग्रेस ने 25 सितंबर को भी विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन किए थे। दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया था और पुलिस ने कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पार्टी ने जिला स्तर पर प्रदर्शन की योजना बनाई थी। झारखंड में भी कांग्रेस ने 28 सितंबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का घेराव और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की घोषणा की थी। इस तरह एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद फिलहाल राजनीतिक प्रदर्शन और सार्वजनिक बयानों के स्तर पर जारी है।

Explore Related Topics

ज्ञानेश कुमार कांग्रेस चुनाव आयोग SIR मतदाता सूची दिल्ली उत्तर प्रदेश राजस्थान महाराष्ट्र जेपी नड्डा राजनीति मुख्य चुनाव आयुक्त

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

इस खबर को खबर पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

ऐसी ही खबरों के लिए निचे स्क्रॉल करें

या होम पेज पर लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए क्लिक करें →

Related News