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लखनऊ के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे सीएम योगी, तटबंध और राहत को लेकर निर्देश

गोमती का जलस्तर बढ़ने के बाद बख्शी का तालाब और फैजुल्लागंज समेत प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे, तटबंध के साथ जल निकासी की भी योजना।
Bureau
Bureau News Desk
05 Oct 2026
06:23 PM
1 min read
लखनऊ के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे सीएम योगी, तटबंध और राहत को लेकर निर्देश
हाइलाइट्स
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया।
- फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती किनारे तटबंध बनाने की घोषणा की गई है।
- मुख्यमंत्री के अनुसार तटबंध को स्वीकृति मिल चुकी है और मानसून के बाद काम आगे बढ़ाया जाएगा।
- तटबंध के साथ आवागमन का रास्ता और जल निकासी के लिए पंपिंग सेट की व्यवस्था की जाएगी।

लखनऊ में गोमती नदी के बढ़े जलस्तर के बीच बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और जमीनी स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद मुख्यमंत्री ने बाढ़ से बचाव के लिए एक दीर्घकालिक ढांचे से जुड़ी योजना की जानकारी दी, जिसके तहत फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बख्शी का तालाब क्षेत्र में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, राहत सामग्री वितरित की और राहत एवं बचाव कार्यों में लगी टीमों से स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए शिविर का भी जायजा लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोमती नदी की बाढ़ से फैजुल्लागंज से नैमिष तक के इलाके को बचाने के लिए तटबंध बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार यह तटबंध ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। तटबंध के साथ रास्ते की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे इसका उपयोग आवागमन के लिए भी हो सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि तटबंध को स्वीकृति दे दी गई है। मानसून समाप्त होने के बाद काम आगे बढ़ाया जाएगा और इसके लिए धनराशि जारी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती नदी के किनारे सर्वे करने और तटबंध का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने तटबंध के बाहर बारिश का पानी जमा नहीं होने देने के लिए जल निकासी की व्यवस्था करने को कहा। इसके लिए पंपिंग सेट लगाने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब नदी का जलस्तर बढ़ेगा और आबादी की ओर पानी जमा होगा, तब पंपिंग व्यवस्था के जरिए पानी को नदी में निकाला जा सकेगा। इस योजना में तटबंध को केवल बाढ़ से बचाव के लिए ही नहीं, बल्कि आवागमन के लिए भी उपयोगी बनाने की बात कही गई है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को दिन में लखनऊ के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इस दौरान फैजुल्लागंज से नैमिष तक के प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया गया। हवाई सर्वे के बाद मुख्यमंत्री बख्शी का तालाब तहसील क्षेत्र पहुंचे। वहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की। मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों की समस्याएं सुनीं और राहत एवं बचाव कार्यों में लगी टीमों से भी स्थिति की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री बख्शी का तालाब में बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट एवं राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी भी ली गई। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का भी जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए शिविर में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पिछले 10 दिनों में उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में भारी बारिश हुई है। उनके अनुसार, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और नेपाल में हुई बारिश का पानी पांच-छह दिन बाद नीचे की ओर पहुंचने से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ा। जलस्तर बढ़ने के कारण बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर और फैजुल्लागंज से नैमिष तक के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्थिति और राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे थे और इसी क्रम में प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी स्थिति देखने पहुंचे।

बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें चावल, दाल, आटा, चना और तिरपाल सहित कुल 26 जरूरी वस्तुएं शामिल हैं। राहत सामग्री में 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल और एक लीटर सरसों या रिफाइंड तेल दिया जा रहा है। इसके अलावा नमक, मिर्च-मसाला, बाल्टी, लाई-भुजा, मोमबत्ती, माचिस और बरसाती समेत अन्य जरूरी सामान भी राहत सामग्री में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को खुले में रहने के बजाय स्कूलों और मैरिज हॉल में बनाए गए राहत शिविरों में ठहराने के निर्देश दिए। इन राहत शिविरों में दोनों समय गर्म भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। छोटे बच्चों के लिए दूध और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ पशुओं के लिए भी व्यवस्था की गई है। पशुओं को सूखा भूसा और चोकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ में डूबने या आकाशीय बिजली से जनहानि होने पर प्रभावित परिवार को तत्काल चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। बारिश के कारण मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत घर उपलब्ध कराने की बात कही गई। पशुहानि की भरपाई भी किए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी। इसके अलावा राहत और बचाव कार्यों के बाद फसलों का समय से सर्वे करने और किसानों को नुकसान का मुआवजा देने की बात कही गई।

बाढ़ के दौरान सांप, बिच्छू और अन्य जीवों से जुड़े खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। कुत्ते या अन्य जानवर के काटने की स्थिति में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल और पशु चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों और उनके पशुओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

राहत शिविरों में बिजली उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य राहत शिविरों में रात के समय प्रकाश की व्यवस्था बनाए रखना है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को घर छोड़कर राहत शिविरों में जाने की स्थिति में उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के राहत शिविरों में चले जाने के बाद उनके घरों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए रात में गश्त की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए गांव के चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी और पुलिस के जवानों को पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य राहत शिविरों में रहने वाले परिवारों के घरों और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सुबह फोन कर लखनऊ में बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री के अनुसार, राजनाथ सिंह ने भी फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनाए जाने से बाढ़ की समस्या से राहत मिलने की बात कही। मुख्यमंत्री ने बताया कि तटबंध को स्वीकृति दी जा चुकी है और इसके लिए धनराशि जारी कर काम आगे बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बाढ़ की स्थिति और राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे थे। बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात के दौरान उन्होंने राहत व्यवस्था की जानकारी ली और संबंधित टीमों से जमीनी स्थिति के बारे में पूछा। प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी दी गई।

बख्शी का तालाब क्षेत्र के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। इसके अलावा मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, विधायक योगेश शुक्ला, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य और नगर पंचायत इटौंजा के अध्यक्ष अखिलेश कुमार अवस्थी भी मौजूद रहे। प्रशासन, पुलिस और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान मौजूद रहे।

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