नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में निचली अदालत के फैसले के बाद अब मामला फिर अदालत के सामने पहुंचा है। चार महिला पहलवानों ने बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट का रुख किया है। इस कानूनी कदम में सह-आरोपित रहे विनोद तोमर के बरी किए जाने को भी चुनौती दी गई है।
पहलवानों की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले और उसमें सबूतों के आकलन के आधार पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका पर विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह की अदालत में सुनवाई होनी है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार, याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन के माध्यम से दाखिल की गई है।
चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त को दिए गए उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व डब्ल्यूएफआई सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था।
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निचली अदालत ने मामले में अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया था। अदालत ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास, दस्तावेजी साक्ष्यों में असंगतियों और घटनाओं के समय तत्काल शिकायत नहीं किए जाने जैसे पहलुओं का उल्लेख किया था।
अब महिला पहलवानों की ओर से दाखिल याचिका में इसी फैसले की कानूनी समीक्षा की मांग की गई है। याचिका में ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आकलन पर आपत्ति दर्ज की गई है।
पहलवानों की ओर से दाखिल याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को कानून की कसौटी पर टिकने योग्य नहीं बताया गया है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि फैसले में उपलब्ध साक्ष्यों का चयनात्मक आकलन किया गया।
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि फैसले में यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों के व्यवहार को लेकर पुराने और रूढ़िगत दृष्टिकोण का सहारा लिया गया, जबकि मामले का आकलन उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए था। ये याचिका में लगाए गए पक्षकारों के तर्क हैं, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
पहलवानों की ओर से यह भी कहा गया है कि महिलाओं द्वारा कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायत करने में देरी या चुप रहने के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां हो सकती हैं। याचिका में इन परिस्थितियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने का दावा किया गया है।
3 अगस्त 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले में फैसला आया था। अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया था।
अदालत के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए थे। फैसले में अदालत ने कुछ गवाहियों में विरोधाभास और दस्तावेजों में असंगतियों का उल्लेख किया था।
अदालत ने यह भी कहा था कि कुछ आरोपों से जुड़े मामलों में तत्काल शिकायत का अभाव और घटनाओं के संबंध में बयानों में अंतर अभियोजन के मामले पर संदेह पैदा करता है। इसी फैसले के बाद चार महिला पहलवानों ने अब ऊपरी अदालत में इसे चुनौती दी है।
यह कानूनी चुनौती केवल बृजभूषण शरण सिंह तक सीमित नहीं है। चार महिला पहलवानों ने विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है।
विनोद तोमर भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव रहे हैं। मामले में उन पर आपराधिक धमकी से संबंधित आरोप लगाए गए थे। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें भी बरी कर दिया था। इस तरह दाखिल याचिका में दोनों आरोपितों को बरी किए जाने के फैसले की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।
चार महिला पहलवानों की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका अब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष है। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह की अदालत ने याचिका पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, याचिका पर अदालत की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के फैसले में अपनाए गए कानूनी आधार और साक्ष्यों के आकलन से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
इस स्तर पर महिला पहलवानों द्वारा दाखिल याचिका ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती है। इसका मतलब यह नहीं है कि निचली अदालत का फैसला स्वतः बदल गया है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही अदालत इस चुनौती पर कोई आदेश देगी।
बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। महिला पहलवानों की ओर से उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। मामला सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच की और आरोपपत्र दाखिल किया था।
इसके बाद मामले की सुनवाई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा दस्तावेजी साक्ष्यों पर भी विचार किया गया।
3 अगस्त 2026 को ट्रायल कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। अदालत के फैसले में अभियोजन साक्ष्यों से संबंधित कई पहलुओं का उल्लेख किया गया था। अब चार महिला पहलवानों की ओर से दाखिल चुनौती के बाद मामले में अगली न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले में गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभासों और दस्तावेजी साक्ष्यों में असंगतियों का उल्लेख किया गया था। अदालत ने कुछ घटनाओं से संबंधित समय, स्थान और परिस्थितियों के विवरण में अंतर पर भी विचार किया था।
एक मामले में अदालत ने घटना के संबंध में शिकायतकर्ता के अलग-अलग बयानों के बीच अंतर का उल्लेख किया था। दूसरे मामले में अदालत ने कहा था कि कथित घटना के समय वहां कई लोग मौजूद होने के बावजूद स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी के रूप में किसी व्यक्ति की गवाही सामने नहीं आई।
इन निष्कर्षों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन के मामले पर संदेह व्यक्त करते हुए दोनों आरोपितों को बरी किया था। अब इन्हीं निष्कर्षों और फैसले के आधारों को महिला पहलवानों ने चुनौती दी है।
चार महिला पहलवानों की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका के जरिए अब ट्रायल कोर्ट के फैसले की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है। ऊपरी अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से रखे गए तर्क और निचली अदालत के फैसले में दर्ज निष्कर्षों की जांच की जाएगी।
मामले की अगली कार्रवाई अदालत के आदेशों के अनुसार आगे बढ़ेगी। फिलहाल ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने का फैसला मौजूद है और महिला पहलवानों की ओर से उसे चुनौती दी गई है।
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