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पार्क से बस तक सुरक्षा पर SC की चिंता, दिल्ली-NCR की घटनाओं पर सख्त रुख

दिल्ली-NCR में हाल की दुष्कर्म घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कानून-प्रवर्तन और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई।
Bureau
Bureau News Desk
28 Sep 2026
12:01 PM
1 min read
पार्क से बस तक सुरक्षा पर SC की चिंता, दिल्ली-NCR की घटनाओं पर सख्त रुख
हाइलाइट्स
दिल्ली-NCR में हालिया दुष्कर्म मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई।
अदालत ने इन घटनाओं में 2012 के निर्भया कांड जैसी समानताओं का संदर्भ दिया।
कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया गया।
पार्क, बस और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर अदालत ने चिंता जताई।

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में महिलाओं के खिलाफ सामने आईं हालिया दुष्कर्म की घटनाओं ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इन मामलों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई और कहा कि घटनाओं में वर्ष 2012 के निर्भया कांड जैसी समानताएं दिखाई देती हैं। अदालत की टिप्पणी में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका तथा महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रमुख रूप से सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को केवल संवेदना या एकजुटता व्यक्त करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के लिए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में हाल में सामने आए दुष्कर्म के मामलों को गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की व्यवस्था संबंधी कमियों को सामने लाती हैं। अदालत के अनुसार, नागरिकों को बुनियादी सार्वजनिक सुरक्षा उपलब्ध कराना प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है। महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में किसी भी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने सुनवाई के दौरान इन घटनाओं की तुलना 2012 के निर्भया कांड के संदर्भ में की। अदालत की टिप्पणी में यह भी सामने आया कि केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर ध्यान देना जरूरी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली-NCR में सामने आई घटनाओं और वर्ष 2012 की घटना के बीच कुछ समानताओं का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि इन घटनाओं को देखते हुए निर्भया कांड से तुलना करने से खुद को रोकना मुश्किल है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दिल्ली-NCR में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक स्थानों की निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा फिर सामने आई है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सुरक्षा का सवाल केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों की स्थिति, रोशनी, निगरानी और प्रशासनिक इंतजाम भी सुरक्षित वातावरण का हिस्सा हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने पार्कों, सार्वजनिक स्थानों और बसों जैसी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। अदालत ने खराब रोशनी, निगरानी की कमी और जरूरी प्रशासनिक सुविधाओं के अभाव को सार्वजनिक सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना। अदालत के मुताबिक, ऐसे स्थानों पर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की कमी महिलाओं के लिए जोखिम बढ़ाने वाली स्थिति पैदा कर सकती है। दिल्ली-NCR जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक स्थलों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं। ऐसे में अदालत की टिप्पणी में इन स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही का मुद्दा प्रमुख रहा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। अदालत ने इन घटनाओं को ऐसी व्यवस्था से जोड़कर देखा जिसमें सुरक्षा के लिए जिम्मेदार संस्थाओं के स्तर पर जवाबदेही तय करना आवश्यक है। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, किसी गंभीर घटना के बाद केवल संवेदना व्यक्त करने के बजाय यह भी देखा जाना चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था में कमी कहां रही और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जानी चाहिए। इस संदर्भ में सार्वजनिक स्थानों की निगरानी, पर्याप्त रोशनी और प्रशासनिक सुविधाओं जैसे बुनियादी इंतजामों को भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा माना गया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का एक प्रमुख हिस्सा महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक वातावरण से जुड़ा रहा। अदालत ने संकेत दिया कि सुरक्षा व्यवस्था केवल किसी अपराध के बाद की कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं हो सकती। महिलाओं को पार्कों, बसों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का प्रभावी होना जरूरी है। अदालत ने प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही को इसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

वर्ष 2012 में दिल्ली में चलती बस में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। घटना के बाद पीड़िता को गंभीर चोटें आईं और बाद में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था। निर्भया कांड के बाद यौन अपराधों से संबंधित कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। 2013 में आपराधिक कानून में संशोधन के जरिए यौन अपराधों से जुड़े कई प्रावधानों को कड़ा किया गया और कुछ अपराधों के लिए सजा के प्रावधानों में बदलाव किए गए। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले में भी 2013 के आपराधिक कानून संशोधन को निर्भया घटना के बाद हुए कानूनी बदलावों के संदर्भ में दर्ज किया गया है। निर्भया मामले में कुल छह आरोपी थे, जिनमें एक नाबालिग था। एक आरोपी की जेल में मौत हो गई थी, जबकि चार दोषियों को बाद में दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।

2012 की घटना के बाद महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित कानूनों की समीक्षा की गई। इसके बाद आपराधिक कानून में संशोधन किया गया और दुष्कर्म तथा अन्य यौन अपराधों के लिए सजा संबंधी प्रावधानों को अधिक कठोर बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2026 के एक फैसले में भी अदालत ने 2013 के आपराधिक कानून संशोधन और भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी में किए गए बदलावों का उल्लेख किया। अदालत ने उस मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा के एक हिस्से में बदलाव किया था। हालांकि, कानून में बदलाव के बाद भी महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले सामने आते रहे हैं। यही संदर्भ हालिया घटनाओं पर अदालत की चिंता में भी दिखाई देता है।

दिल्ली-NCR में हाल में सामने आए एक मामले में एक नाबालिग लड़की से चलती बस में दुष्कर्म का मामला सामने आया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद बस और उसके भीतर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की गई। रिपोर्टिंग में बस के अंदर लगे सीसीटीवी तंत्र के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इस घटना ने सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा उपायों, निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए। बाहरी सीसीटीवी फुटेज सहित जांच के अन्य माध्यमों के जरिए मामले की जांच आगे बढ़ाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही को विशेष महत्व दिया गया। अदालत ने संकेत दिया कि किसी घटना के बाद जांच और कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि घटना को रोकने के लिए मौजूद व्यवस्थाएं किस तरह काम कर रही थीं। पार्क, बस, सड़क और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी, निगरानी तथा प्रशासनिक सुविधाएं नागरिक सुरक्षा से सीधे जुड़ी हैं। अदालत ने इन्हीं व्यवस्थाओं में कमी को लेकर चिंता व्यक्त की।

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