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1 अक्टूबर को कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? निफ्टी के सपोर्ट-रेजिस्टेंस जानें

विदेशी निवेशकों की सेल आउट, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये के बीच 1 अक्टूबर को 22,500-23,000 का दायरा अहम रहेगा।
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Bureau News Desk
30 Sep 2026
09:35 PM
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1 अक्टूबर को कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? निफ्टी के सपोर्ट-रेजिस्टेंस जानें
हाइलाइट्स
30 सितंबर को निफ्टी 95.75 अंक गिरकर 22,620.45 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स 48.78 अंक गिरकर 72,480.29 पर बंद रहा।
निफ्टी के लिए 22,500 महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर माना जा रहा है।
ऊपर की ओर 22,800-23,000 का क्षेत्र महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र है।

मुंबई, 30 सितंबर। सितंबर के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों कमजोर होकर बंद हुए। अब 1 अक्टूबर को नए कारोबारी महीने की शुरुआत के साथ निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधि, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और निफ्टी के तकनीकी स्तरों पर रहेगी।

बुधवार को सेंसेक्स 48.78 अंक यानी 0.07 प्रतिशत गिरकर 72,480.29 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 95.75 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,620.45 पर रहा। सितंबर में निफ्टी करीब 6.1 प्रतिशत और सेंसेक्स करीब 5.8 प्रतिशत नीचे रहा। ऐसे में 1 अक्टूबर के कारोबार को लेकर बाजार में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर रहेगा कि निफ्टी 22,500 के आसपास बने सपोर्ट को कायम रखता है या नहीं और ऊपर की तरफ 22,800 से 23,000 के क्षेत्र में कैसी गतिविधि दिखाई देती है।

बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी विश्लेषण में निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट बताया गया है। इसके नीचे निर्णायक कमजोरी आने पर 22,200 के आसपास अगला महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। दूसरी तरफ, ऊपर की ओर 22,800-23,000 का क्षेत्र अहम प्रतिरोध क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। तकनीकी विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि 23,000 के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने तक बाजार की संरचना पर सावधानी बनी रह सकती है। यह स्तर बाजार की संभावित दिशा की गारंटी नहीं हैं। ये तकनीकी विश्लेषण में इस्तेमाल किए जाने वाले सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर हैं, जिन पर कारोबार के दौरान खरीद-बिक्री की गतिविधि बढ़ सकती है।

30 सितंबर को निफ्टी ने दिन के दौरान ऊपरी स्तरों पर जाने की कोशिश की, लेकिन बाद में सेल आउट के कारण बढ़त कायम नहीं रख सका। कारोबारी सत्र के अंत में इंडेक्स 22,620.45 पर बंद हुआ। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार 22,500 के नीचे कमजोरी बढ़ने की स्थिति में 22,200 के आसपास का स्तर अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट हो सकता है। दूसरी ओर, 22,800 के ऊपर टिकने पर 23,000 के स्तर की ओर बाजार की नजर जा सकती है। एक अन्य तकनीकी आकलन में निफ्टी के लिए 22,600 और 22,500 को सपोर्ट तथा 22,900 और 23,000 को प्रतिरोध क्षेत्र बताया गया है। इसका मतलब यह है कि 1 अक्टूबर को 22,500-23,000 का क्षेत्र कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकता है।

30 सितंबर को सेंसेक्स 72,480.29 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इंडेक्स में मजबूती भी देखी गई, लेकिन अंत में बढ़त टिक नहीं सकी। तकनीकी स्तरों के अनुसार सेंसेक्स के लिए 72,300 और 72,000 के आसपास सपोर्ट क्षेत्र बताए गए हैं। ऊपर की तरफ 72,700 और 73,000 के स्तरों पर प्रतिरोध देखा जा रहा है। इसलिए 1 अक्टूबर के सत्र में सेंसेक्स के लिए इन स्तरों के आसपास की गतिविधि बाजार की चाल को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

बैंक निफ्टी भी अगले कारोबारी सत्र के लिए महत्वपूर्ण इंडेक्स रहेगा। उपलब्ध तकनीकी विश्लेषण में बैंक निफ्टी के लिए 54,000-53,750 का सपोर्ट क्षेत्र और 54,750-55,000 का प्रतिरोध क्षेत्र बताया गया है। अन्य तकनीकी विश्लेषण में 54,000 के आसपास के क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण माना गया है। बाजार की आगे की चाल में बैंकिंग शेयरों की भागीदारी इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि बैंकिंग क्षेत्र का निफ्टी पर बड़ा प्रभाव रहता है। हालांकि किसी एक स्तर के टूटने या पार होने को बाजार की निश्चित दिशा का संकेत नहीं माना जा सकता। कारोबार के दौरान वॉल्यूम, वैश्विक बाजार और अन्य आर्थिक संकेतक भी भूमिका निभाते हैं।

भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण दबावों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की सेल आउट शामिल है। 29 सितंबर को एफआईआई ने भारतीय शेयरों में करीब 9,980.22 करोड़ रुपये की शुद्ध सेल आउट की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक यानी डीआईआई करीब 6,952.71 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे। 

सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों की सेल आउट बाजार के लिए एक प्रमुख दबाव बनी रही। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार सितंबर में भारतीय इक्विटी से विदेशी निवेशकों की निकासी करीब 2.7 अरब डॉलर रही। साल 2026 में अब तक यह निकासी करीब 26.8 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। 30 सितंबर को भी विदेशी निवेशकों की गतिविधि बाजार की निगाह में रही। ऐसे में 1 अक्टूबर के कारोबार में एफआईआई और डीआईआई के आंकड़े बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल रहेंगे।

भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। 30 सितंबर को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई थी। बाजार रिपोर्टों में इसे भारतीय शेयरों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल किया गया है। कच्चे तेल में तेजी से भारत के आयात बिल, रुपये और महंगाई से जुड़े बाजार आकलन प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए 1 अक्टूबर को तेल की कीमतों में होने वाला बदलाव बाजार के लिए महत्वपूर्ण बाहरी संकेत रहेगा।

30 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 95.83 पर बंद हुआ। सितंबर में रुपये में करीब 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि जुलाई-सितंबर तिमाही में इसमें करीब 1.2 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। रुपये पर कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी पूंजी प्रवाह जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। बाजार के लिए रुपये की स्थिरता विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी क्योंकि विदेशी निवेशकों की गतिविधि और आयात लागत दोनों इससे प्रभावित हो सकते हैं।

भारतीय बाजार की दिशा केवल घरेलू संकेतकों से तय नहीं होती। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी शेयर बाजार, एशियाई बाजार और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के शुरुआती रुख को प्रभावित कर सकती हैं। 30 सितंबर की बाजार रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में दबाव में रहे और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंचे स्तरों पर बनी रही। वहीं जापान और दक्षिण कोरिया समेत कुछ एशियाई बाजारों में तेजी दर्ज की गई। इसलिए 1 अक्टूबर की सुबह कारोबार शुरू होने से पहले वैश्विक बाजारों के रुख पर निवेशकों की नजर रहेगी।

सितंबर भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर महीना रहा। निफ्टी 50 में महीने के दौरान करीब 6.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सेंसेक्स करीब 5.8 प्रतिशत नीचे रहा। यह मार्च के बाद प्रमुख भारतीय सूचकांकों के लिए सबसे कमजोर महीनों में से एक रहा। सितंबर के दौरान सभी 16 प्रमुख सेक्टर इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई। आईटी क्षेत्र में लगभग 11.2 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी कमजोरी देखी गई।

ऐसे में अक्टूबर की शुरुआत बाजार के लिए एक नए कारोबारी महीने का पहला सत्र होगी, लेकिन पिछले महीने की कमजोर स्थिति के कारण निवेशकों की निगाहें तकनीकी स्तरों और विदेशी पूंजी प्रवाह पर बनी रह सकती हैं। उपलब्ध तकनीकी आकलनों को एक साथ देखें तो निफ्टी के लिए प्रमुख स्तर इस प्रकार हैं:

इंडेक्स सपोर्ट प्रतिरोध
निफ्टी 50 22,500-22,600 22,800-23,000
सेंसेक्स 72,000-72,300 72,700-73,000
बैंक निफ्टी 53,750-54,000 54,750-55,000

ये स्तर विभिन्न तकनीकी विश्लेषणों में बताए गए क्षेत्र हैं और इन्हें निश्चित बाजार परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

बाजार खुलने से पहले अक्सर शुरुआती संकेतों के आधार पर निवेशक गैप-अप या गैप-डाउन की चर्चा करते हैं। लेकिन किसी एक शुरुआती स्तर से पूरे कारोबारी दिन की दिशा तय नहीं होती। 1 अक्टूबर को भी शुरुआती संकेतों के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निफ्टी उस स्तर को कायम रख पाता है या नहीं। विशेष रूप से 22,500 और 22,800-23,000 के बीच की गतिविधि तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण रह सकती है। अगर बाजार शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद इन स्तरों के आसपास स्थिर रहता है, तो कारोबार का स्वरूप अलग हो सकता है; वहीं महत्वपूर्ण सपोर्ट या प्रतिरोध के निर्णायक टूटने या पार होने पर बाजार में गतिविधि बढ़ सकती है। यह केवल तकनीकी परिदृश्य है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

30 सितंबर के कारोबार में बैंकिंग क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में मजबूती रही। कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिगो, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर Eternal, सन फार्मा, टाइटन, टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स में कमजोरी रही। हेल्थकेयर शेयरों में भी दबाव देखा गया और मैक्स हेल्थकेयर तथा अपोलो हॉस्पिटल्स में तेज गिरावट दर्ज की गई। 1 अक्टूबर को सेक्टर-वार प्रदर्शन कंपनी-विशिष्ट खबरों, वैश्विक संकेतों, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल और बाजार में पूंजी प्रवाह के आधार पर अलग-अलग रह सकता है।

नए कारोबारी महीने के पहले दिन बाजार को समझने के लिए कुछ प्रमुख संकेत महत्वपूर्ण होंगे:

  • निफ्टी का 22,500 के आसपास व्यवहार
  • 22,800-23,000 के क्षेत्र में खरीदारी या सेल आउट
  • बैंक निफ्टी का 54,000 के आसपास प्रदर्शन
  • एफआईआई और डीआईआई की नकद बाजार गतिविधि
  • कच्चे तेल की कीमत
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल
  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
  • एशियाई शेयर बाजारों का रुख
  • वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम
  • प्रमुख कंपनियों से आने वाली खबरें

सितंबर में भारतीय बाजारों में लगातार कमजोरी और विदेशी पूंजी निकासी के कारण अस्थिरता बनी रही। निफ्टी के लगातार कई सप्ताह कमजोर रहने के बाद तकनीकी विश्लेषकों ने 22,500 को महत्वपूर्ण स्तर के रूप में चिन्हित किया है। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी विदेशी सेल आउट के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित करती रही है। 29 सितंबर के आंकड़ों में भी एफआईआई शुद्ध विक्रेता और डीआईआई शुद्ध खरीदार रहे। 1 अक्टूबर को इन दोनों निवेशक वर्गों की गतिविधि बाजार की दिशा समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़ों में शामिल होगी।

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