Friday, 02 October 2026 | Lucknow | 29°C

NEP-2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरुकुल शिक्षा की झलक: प्रो. गीता सिंह

बीएचयू और बी.एन.के.बी. पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का समापन, समग्र एवं बहुविषयी शिक्षा पर विशेषज्ञों ने रखे विचार।
Bureau
Bureau News Desk
01 Oct 2026
06:49 PM
1 min read
NEP-2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरुकुल शिक्षा की झलक: प्रो. गीता सिंह
हाइलाइट्स
बीएचयू और बी.एन.के.बी. पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यक्रम आयोजित किया गया।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय की सीपीडीएचई निदेशिका प्रो. गीता सिंह रहीं।

भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ज्ञान, संस्कार और जीवन-मूल्यों की भूमिका को लेकर एक बार फिर चर्चा हुई। उच्च शिक्षा में बदलाव, विषयों के बीच समन्वय और भारतीय बौद्धिक परंपरा को समझने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय स्तर के शैक्षिक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। इस दौरान गुरुकुल परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और आधुनिक शिक्षा की अवधारणाओं के बीच संबंध भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के शैक्षिक उद्देश्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्संबंधों पर आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति अभिविन्यास एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का समापन हो गया। यह कार्यक्रम यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और बी.एन.के.बी. पीजी कॉलेज, अकबरपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन समग्र एवं बहुविषयी शिक्षा विषय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। चर्चा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत शिक्षा के व्यापक स्वरूप, विभिन्न विषयों के बीच समन्वय और भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर ध्यान केंद्रित किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला स्थित यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. देशराज ठाकुर ने व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में समग्र एवं बहुविषयी शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान का प्रमुख विषय शिक्षा को पारंपरिक विषयगत सीमाओं तक सीमित न रखते हुए विभिन्न ज्ञान-विधाओं के बीच समन्वय स्थापित करना रहा। बहुविषयी शिक्षा की अवधारणा के अंतर्गत अलग-अलग विषयों के ज्ञान को एक-दूसरे से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि उच्च शिक्षा में विभिन्न विषयों के अध्ययन के साथ समग्र शैक्षिक दृष्टिकोण को किस प्रकार महत्व दिया जा सकता है।

ये खबर भी पढ़े - अंबेडकरनगर में 31 अक्टूबर तक चलेगा संचारी रोग नियंत्रण अभियान, घर-घर पहुंचेंगी टीमें

समापन समारोह की मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के सीपीडीएचई की निदेशिका प्रो. गीता सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को भारतीय बौद्धिक परंपरा के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यबोध, गुरुकुल पद्धति और ऋषि परंपरा की प्रासंगिकता पर विशेष जोर दिया। प्रो. गीता सिंह के अनुसार, भारतीय शिक्षा-दृष्टि का उद्देश्य केवल सूचना प्राप्त करना या रोजगार हासिल करना नहीं रहा है, बल्कि ज्ञान, विवेक, चरित्र, अनुशासन, कर्तव्यबोध और जीवन-मूल्यों से संपन्न व्यक्ति का निर्माण भी इसका महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। उन्होंने शिक्षा के इस व्यापक स्वरूप को भारतीय परंपरा से जोड़ते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की समग्र एवं बहुविषयी अवधारणा पर चर्चा की।

अपने संबोधन में प्रो. गीता सिंह ने गुरुकुल शिक्षा पद्धति के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने गुरु-शिष्य संबंध की आत्मीयता, प्रकृति के सान्निध्य में सीखने की प्रक्रिया तथा शिक्षा के जीवनोपयोगी और मूल्यपरक स्वरूप पर ध्यान आकर्षित किया। गुरुकुल परंपरा की चर्चा के दौरान शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम या विषयों के अध्ययन तक सीमित न मानकर जीवन से जोड़ने की अवधारणा सामने आई। उन्होंने भारतीय ऋषि परंपरा को ज्ञान की अखंड साधना के रूप में प्रस्तुत किया। इस परंपरा में विभिन्न ज्ञान-विधाओं के बीच कृत्रिम विभाजन नहीं होने की बात भी कही। प्रो. गीता सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की समग्र एवं बहुविषयी शिक्षा की अवधारणा को भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल चेतना से जोड़ते हुए उसके समकालीन पुनर्पाठ की आवश्यकता बताई।

समापन सत्र की अध्यक्षता निदेशक प्रो. आनन्द वर्द्धन शर्मा ने की। उन्होंने सात दिवसीय कार्यक्रम की अकादमिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार, समावेशन और भारतीय ज्ञान-दृष्टि से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान हुई शैक्षिक चर्चाओं और अकादमिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए उच्च शिक्षा में नीति के उद्देश्यों को समझने और उनसे संबंधित शैक्षिक दृष्टिकोण विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्राचार्या प्रो. शुचिता पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए विशेषज्ञों, प्रतिभागियों, समन्वयकों, शिक्षकों और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. कमल त्रिपाठी ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया।

सात दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति अभिविन्यास एवं संवेदीकरण कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षकों और प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन वागीश शुक्ल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सिद्धार्थ पाण्डेय ने प्रस्तुत किया। समापन सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र शिक्षा और उच्च शिक्षा के विभिन्न आयामों पर हुई चर्चाओं के साथ सात दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हुआ।

Explore Related Topics

NEP-2020 राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा गुरुकुल पद्धति प्रो गीता सिंह प्रो देशराज ठाकुर बीएचयू बीएनकेबी पीजी कॉलेज अम्बेडकरनगर अकबरपुर शिक्षा समाचार उच्च शिक्षा समग्र शिक्षा बहुविषयी शिक्षा

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

इस खबर को खबर पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

ऐसी ही खबरों के लिए निचे स्क्रॉल करें

या होम पेज पर लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए क्लिक करें →

Related News